एक्सपर्ट ने बताया भारत का सही कदम
वॉल स्ट्रीट जर्नल में कॉलमिस्ट और जियोपॉलिटिक्स के जानकारी सदानंद धुमे ने रूसी तेल खरीद कम करने को भारत का सही कदम बताया है। धुमे ने एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील को एक डिप्लोमैटिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने आलोचना करने वालों को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि सरकार अखबारों में अच्छे आर्टिकल के लिए अर्थव्यवस्था को बर्बाद नहीं कर सकती।
धुमे ने एक्स पर लिखा, टालमटोल और कमजोर दिखने के बजाय, भारत सरकार को हिम्मत करके साफ-साफ कहना चाहिए-
1- भारत ने दंडात्मक अमेरिकी टैरिफ हटाने के बदले में रूसी तेल की खरीद कम करने पर सहमति जताई है।
2- यह कदम पूरी तरह से सही है। भारत आसानी से रूसी तेल की जगह दूसरे सोर्स से तेल ले सकता है। दुनिया में सबसे ज्यादा अमेरिकी टैरिफ दरों का सामना करते हुए वह असल में बड़े पैमाने पर जरूरी निवेश और टेक्नोलॉजी को आकर्षित करने या एक निर्यातक के तौर पर प्रतिस्पर्धी होने की उम्मीद नहीं कर सकता था।
3- कड़ी मेहनत से हुई अमेरिका-भारत ट्रेड डील एक डिप्लोमैटिक और आर्थिक उपलब्धि है, जिस पर भारतीयों को गर्व होना चाहिए। कोई भी जिम्मेदार सरकार सिर्फ इसलिए अर्थव्यवस्था को बर्बाद नहीं कर सकती ताकि वामपंथी ओपिनियन लिखने वाले खुद के बारे में अच्छा महसूस हो।
भारत की उपलब्धि तारीफ के काबिल
दक्षिण एशिया मामलों के जानकार माइकल कुगलमैन ने भी इस डील के लिए भारत की रणनीति की तारीफ की है। नवभारत टाइम्स पर लिखे एक लेख में उन्होंने कहा कि भारत ने इस डील के माध्यम से दिखा दिया कि अपनी बात मनवाने के लिए ट्रंप की खुशामद करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भारत के धैर्य की तारीफ करते हुए कहा कि यह उपलब्धि तारीफ के काबिल है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में तमाम झटकों के बावजूद भारत ने रूस के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखे। इसके साथ ही चीन के साथ रिश्तों में भी स्थिरता आई है।













