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  • भारतीय नौसेना के जहाज सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड क्यों जा रहे हैं, आखिर क्या है मिशन?

    नई दिल्ली: भारतीय तटरक्षक और नौसेना के समुद्री जहाज सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों का दौरा करेंगे। यहां भारतीय नौसेना के जवान व अधिकारी मेजबान देशों की नौसेनाओं के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास भी करेंगे। भारतीय नौसेना का फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन (1टीएस) दक्षिण पूर्व एशिया में तैनाती पर जाएगा। इनमें भारतीय नौसेना के


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    By Azad Hind Desk जनवरी 8, 2026
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    नई दिल्ली: भारतीय तटरक्षक और नौसेना के समुद्री जहाज सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों का दौरा करेंगे। यहां भारतीय नौसेना के जवान व अधिकारी मेजबान देशों की नौसेनाओं के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास भी करेंगे। भारतीय नौसेना का फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन (1टीएस) दक्षिण पूर्व एशिया में तैनाती पर जाएगा। इनमें भारतीय नौसेना के आईएनएस तीर, आईएनएस शार्दूल, आईएनएस सुजाता और तटरक्षक पोत सारथी शामिल हैं।

    110वें इंटीग्रेटेड ऑफिसर्स ट्रेनिंग कोर्स के तहत नौसेना का फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए लंबी दूरी प्रशिक्षण तैनाती पर रवाना होगी। इस तैनाती के दौरान नौसेना की यह स्क्वाड्रन सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड के बंदरगाहों का दौरा करेगी। इस तैनाती का उद्देश्य अधिकारी प्रशिक्षुओं को ऑपरेशनल दक्षता, समुद्री प्रक्रियाओं और अलग-अलग तरह के वातावरण का व्यापक अनुभव प्रदान करना है।

    इस यात्रा को लेकर भारतीय नौसेना का आया जवाब

    भारतीय नौसेना का कहना है कि यह पहल भारत की एक्ट ईस्ट नीति और मुक्त, खुले तथा समावेशी हिंद महासागर क्षेत्र के प्रति देश की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन की यात्रा के दौरान विभिन्न मेजबान देशों की नौसेनाओं तथा समुद्री एजेंसियों के साथ व्यावसायिक बातचीत समेत कई गतिविधियां होंगी।

    यहां प्रशिक्षण, क्रॉस-डेक विजिट, विशेषज्ञों के साथ संवाद, और संयुक्त समुद्री साझेदारी अभ्यास आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से नौसेनाओं के बीच पारस्परिक आपसी विश्वास, ऑपरेशनल समझ, और अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा मिलेगा।

    110वें इंटीग्रेटेड ऑफिसर्स ट्रेनिंग कोर्स में छह अंतरराष्ट्रीय अधिकारी प्रशिक्षु भी भाग ले रहे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी मित्र देशों के लिए भारतीय नौसेना की क्षमता निर्माण और पेशेवर प्रशिक्षण की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस तैनाती में भारतीय थलसेना और वायुसेना के कर्मी भी शामिल हैं। इससे तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और तालमेल भी अधिक सुदृढ़ होगा।

    रक्षा विशेषज्ञों ने क्या कहा

    रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण की उत्कृष्टता, समुद्री कूटनीति, सद्भावना निर्माण और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा में सहयोगात्मक दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करती है।

    बता दें कि भारत और मोजाम्बिक के राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ पर भारतीय नौसेना का फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन मोजाम्बिक की राजधानी मापुटो पहुंचा था। भारतीय तटरक्षक जहाज सारथी भी इनके इस बेड़े में शामिल था। भारतीय समुद्री जहाजों ने मोजाम्बिक में विभिन्न गतिविधियों एवं मुलाकातों के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इसके अलावा कुछ माह पूर्व भारतीय नौसेना के फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन के ही समुद्री जहाज फ्रांस के ला रियूनियन और मॉरीशस के पोर्ट लुई पहुंचे थे।

    इस नौसेनिक बेड़े में भी आईएनएस तीर व आईएनएस शार्दूल शामिल रहे। इनके अलावा भारतीय तटरक्षक दल का समुद्री जहाज आईसीजीएस सारथी भी उस अभियान का हिस्सा रहा। भारतीय नौसेना के मुताबिक ये भारतीय समुद्री जहाज अपनी लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती के अंतर्गत दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में ला रियूनियन और पोर्ट लुई, मॉरीशस पहुंचे थे।

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