सीधे प्रवेश की जगह अब खेलने होंगे क्वालिफायर्स
एएफसी के नियमों के मुताबिक, किसी भी क्लब को एएफसी प्रतियोगिताओं में सीधे प्रवेश पाने के लिए एक सीजन में कम से कम 24 मैच लीग और कप मिलाकर खेलने अनिवार्य होते हैं। देरी से शुरू होने के कारण इस आईएसएल सीजन में क्लब औसतन केवल 16 मैच (13 आईएसएल + 3 सुपर कप) ही खेल पाएंगे। एएफसी के उप महासचिव शिन मैन गिल ने एआईएफएफ को लिखे लेटर में स्पष्ट किया कि ‘चूंकि सदस्य संघ पात्रता मानदंडों को पूरा करने में विफल रहे हैं, इसलिए सीधे स्लॉट की संख्या को पूरी तरह से अप्रत्यक्ष स्लॉट में बदल दिया जाएगा।’ इसका मतलब है कि आईएसएल और सुपर कप विजेताओं को अब एएफसी चैंपियंस लीग 2 के मुख्य दौर में पहुंचने के लिए ज़ोनल क्वालिफायर्स के कठिन रास्ते से गुजरना होगा।
14 फरवरी से शुरू होगा मिनी सीजन
अनिश्चितताओं के बादल छंटने के बाद, आईएसएल 2025-26 सीजन अब 14 फरवरी 2026 से शुरू होगा। सभी 14 टीमों ने भागीदारी की पुष्टि कर दी है। यह सीजन सामान्य होम और अवे फॉर्मेट के बजाय सिंगल लेग राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेला जाएगा। हर टीम एक-दूसरे से केवल एक बार भिड़ेगी। पूरे सीजन में कुल 91 मैच खेले जाएंगे। AIFF ने मांगी थी विशेष छूट इससे पहले, एआईएफएफ के उप महासचिव एम. सत्यनारायण ने एएफसी को लेटर लिखकर असाधारण परिस्थितियों का हवाला देते हुए 24 मैचों के नियम में एक बार की छूट मांगी थी। उन्होंने अनुरोध किया था कि 16 मैचों को ही सीधे प्रवेश के लिए पर्याप्त माना जाए। हालांकि, एएफसी ने सीजन को तो मान्यता दे दी, लेकिन स्लॉट को डाउनग्रेड कर दिया।
क्यों हुई सीजन में इतनी देरी?
इस सीजन में देरी का मुख्य कारण एआईएफएफ और उसके वाणिज्यिक भागीदार एफएसडीएल (रिलायंस ग्रुप) के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट को लेकर चल रही रस्साकशी थी। यह एग्रीमेंट 8 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था और नई शर्तों पर सहमति न बन पाने के कारण जुलाई से ही लीग का भविष्य अधर में लटका हुआ था। यह फैसला मिश्रित भावनाओं वाला है। अच्छी खबर यह है कि सीजन रद्द नहीं हुआ और फुटबॉल का रोमांच मैदान पर लौटेगा। लेकिन बुरी खबर यह है कि भारतीय क्लबों के लिए एशिया के मंच पर चमकना अब और कठिन हो गया है। क्वालिफायर्स का रास्ता हमेशा जोखिम भरा होता है, लेकिन यह खिलाड़ियों और क्लबों के लिए खुद को साबित करने का एक और मौका भी होगा।














