चटगांव पोर्ट, भारतीय सीमा के काफी करीब है। जैसा की आप मैप में देख सकते हैं। नॉर्थ ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक DTSA के सीनियर सुरक्षा सलाहकार स्टीवन बैरी जेम्स ने चटगांव नेवल एरिया के कमांडर रियर एडमिरल हसन से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद बांग्लादेशी अधिकारी उन्हें लेकर चटगांव ड्राई डॉक लिमिटेड (CDDL) गये, जहां लेफ्टिनेंट कमांडर जाहिद मोहसिन कबीर ने भविष्य के ऑपरेशंस, बांग्लादेशी नौसेना की क्षमता और आगे वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर एक प्रजेंटेशन दिया है।
बांग्लादेश में चटगांव पोर्ट पर अमेरिकी अधिकारी
सबसे दिलचस्प बात ये है कि बांग्लादेश, जो अमेरिकी अधिकारियों के यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर ढिंढोरा पीटता है, उसने स्टीवन बैरी जेम्स की यात्रा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। नॉर्थ ईस्ट आई ने बांग्लादेशी सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया है कि DTSA, दोहरे इस्तेमाल वाली चीजों और गोला-बारूद के एक्सपोर्ट लाइसेंस की समीक्षा करने वाली एजेंसी के तौर पर काम करती है। इसके अलावा ये एक्सपोर्ट लाइसेंस आवेदनों पर टेक्निकल और पॉलिसी को लेकर आकलन रिपोर्ट बनाती है, इसलिए यह रक्षा टेक्नोलॉजी का भी आकलन कर सकती है और बांग्लादेश सरकार और इंडस्ट्री के साथ मिलकर उपाय विकसित कर सकती है।
आपको बता दें कि DTSA का मकसद ऐसी टेक्नोलॉजी और जानकारी के प्रसार या गलत इस्तेमाल को रोकना है जो अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। DTSA को 1980 के दशक में बनाया गया था इसका लक्ष्य अमेरिका के सहयोगियों और पार्टनर्स की टेक्नोलॉजी सुरक्षा और साझा नजरिए को बढ़ावा देना, रणनीतिक प्रतिस्पर्धियों के टेक्नोलॉजी अधिग्रहण और उनके तरीकों का मुकाबला करना है। इसके अलावा DTSA एडवांस अमेरिकी हथियार, सिस्टम, उपकरण और टेक्नोलॉजी के प्रस्तावित ट्रांसफर, जानकारी, टेक्नोलॉजी को लेकर भी आकलन करता है। इसीलिए सवाल ये है कि क्या अमेरिका, बांग्लादेश की नौसेना को कोई टेक्नोलॉजी सौंपने की तैयारी तो नहीं कर रहा है?













