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  • ‘भारतीय हर सर्विस लूटते हैं’, आयरलैंड में फूडबैंक के बाहर की एक फोटो से नस्लीय हमला, सोशल मीडिया पर जहर

    डबलिन: आयरलैंड के एक अखबार में छपी भारतीयों की एक तस्वीर पर जमकर नस्लीय टिप्पणियां की जा रही हैं। 21 फरवरी को आयरलैंड के एक अखबार में एक आर्टिकल छापा गया। जिसमें आयरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ गॉलवे में एक फूड बैंक के बाहर लाइन में खड़े लोगों की तस्वीर थी। इस तस्वीर में दक्षिण एशियाई


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    By Azad Hind Desk फरवरी 24, 2026
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    डबलिन: आयरलैंड के एक अखबार में छपी भारतीयों की एक तस्वीर पर जमकर नस्लीय टिप्पणियां की जा रही हैं। 21 फरवरी को आयरलैंड के एक अखबार में एक आर्टिकल छापा गया। जिसमें आयरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ गॉलवे में एक फूड बैंक के बाहर लाइन में खड़े लोगों की तस्वीर थी। इस तस्वीर में दक्षिण एशियाई मूल के लोग दिख रहे थे। इस आर्टिकल में इस बात पर फोकस था कि यूनिवर्सिटी ने डिमांड बढ़ने की वजह से स्टूडेंट्स को अपने फूड बैंक से वापस भेज दिया। लेकिन इस लेख में कहीं ये नहीं बताया गया था कि सर्विस इस्तेमाल करने वाले छात्र किस देश के हैं। लेकिन इस लेख के छपने के बाद भारतीयों के खिलाफ नफरती टिप्पणियां शुरू हो गई हैं।

    इस लेख को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आयरिश शख्स ने शेयर किया जिसके कैप्शन में लिखा था कि “अगर भारतीय अपना गुजारा नहीं कर सकते तो वे आयरलैंड में क्यों हैं? या यह सिर्फ पैसे बचाने का एक स्कैम है?” उसके बाद से इस पोस्ट ने देश में भारतीय छात्रों की मौजूदगी पर तीखी बहस छेड़ दी है, और कई लोग तो उन्हें वापस भारत भेजने की भी मांग कर रहे हैं।

    आयरिश टाइम्स की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूनिवर्सिटी ऑफ गैलवे फूड बैंक ने पिछले साल करीब €500,000 (लगभग 5 करोड़) का खाना बांटा था। लेकिन, बहुत ज्यादा डिमांड की वजह से उसे हर हफ्ते सैकड़ों स्टूडेंट्स को मना करना पड़ा। रिपोर्ट में आयरलैंड में बढ़ते कॉस्ट-ऑफ-लिविंग संकट पर भी जोर दिया गया है। इस लेख में बताया गया है कि पेंट्री डोनेगल के स्टूडेंट एडम मुलिंस ने शुरू की थी, जिन्होंने कहा कि “जीवन यापन में बढ़ती लागत का संकट बहुत ज़्यादा है और इसका हम (स्टूडेंट्स) पर बहुत ज़्यादा असर पड़ता है”।

    आर्टिकल में बताया गया है कि “शुरू में यह उनके किराए के स्टूडेंट अकोमोडेशन के शेड से चलता था जिसमें डोनेट किया हुआ चेस्ट फ्रीजर इस्तेमाल होता था और पूरे काउंटी गॉलवे के सुपरमार्केट से बचा हुआ खाना इकट्ठा किया जाता था।” वहीं कई छात्रों ने बताया है कि खाना नहीं मिलने की वजह से वो अपनी पढ़ाई बंद कर सकते हैं। लेकिन इस लेख में कहीं नहीं बताया गया है कि क्या विदेशी छात्र भी फूड बैंक पर निर्भर हैं? फिर भी नस्लीय टिप्पणियां की जा रही हैं।

    भारतीयों पर एक फोटो के आधार पर नस्लीय टिप्पणी
    पॉल नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है कि “आयरिश टाइम्स ने कल एक आर्टिकल छापा कि गॉलवे यूनिवर्सिटी ने एक फूड बैंक से छात्रों को मना कर दिया। उनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा छात्र वीजा पर आए भारतीय नागरिक थे। अगर भारतीय अपना गुजारा नहीं कर सकते तो वे आयरलैंड में क्यों हैं या यह सिर्फ पैसे बचाने का एक स्कैम है।” वहीं एक और X यूजर ने खास तौर पर समुदाय पर गुस्सा निकालते हुए दावा किया “यह भारतीयों की आदत है… दूसरे देशों में ऑनलाइन भारतीयों के वीडियो भी हैं जो साथी भारतीयों को फूड बैंक का इस्तेमाल करके पैसे बचाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।”

    एक और सोशल मीडिया यूजर ने आरोप लगाया कि “वे किसी भी तरह के भरोसे वाले सिस्टम का इस्तेमाल करके देश की हर सर्विस को लूटते हैं। अगर आपको बेघर और गरीबों से चोरी करने में शर्म आनी चाहिए, तो चिंता न करें, वे नहीं हैं। उनके लिए यह एक लाइफहैक है।” इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक एक और कमेंट में बिना किसी सबूत के दावा किया गया “पूरी लाइन भारतीयों की है।”

    आयरलैंड में अकसर भारतीयों के खिलाफ नस्लीय हिंसा होती रही है। पिछले साल कई घटनाएं सामने आई थीं। पिछले साल 40 साल के भारतीय आदमी, जो Amazon में काम कर रहे थे उनपर डबलिन के टैलाघ्ट कुछ लोगों ने नस्लीय हमला कर दिया था। जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गये थे। उन्हें पीटा गया था और उनके चेहरे पर चाकू मारा गया था। उनके कपड़े उतार दिए गए थे। ये एक नस्लीय हिंसा था।

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