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  • भारत-अमेरिका के बीच हुई ‘ट्रेड डील’ में चुपचाप किया जा रहा बदलाव? फैक्ट शीट में संशोधन के मिल रहे संकेत

    नई दिल्ली: भारत -अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अब एक नई और चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। अब मीडिया रिपोर्ट में यह कहा जा रहा है कि मार्च के मध्य में अंतिम हस्ताक्षर से पहले इसमें अभी भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने दालों और 500


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    By Azad Hind Desk फरवरी 11, 2026
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    नई दिल्ली: भारत -अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अब एक नई और चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। अब मीडिया रिपोर्ट में यह कहा जा रहा है कि मार्च के मध्य में अंतिम हस्ताक्षर से पहले इसमें अभी भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने दालों और 500 अरब डॉलर की खरीद “प्रतिबद्धता” से संबंधित कुछ शर्तों के आधिकारिक रूप से जारी अमेरिका-भारत संयुक्त बयान से अलग होने के बाद चुपचाप अपने फैक्ट शीट में संशोधन किया है।

    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस कुछ मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहा है जिससे पता चलता है कि भारत-अमेरिका के बीच अभी भी गु्प्त रूप से वार्ता जारी है। फैक्ट शीट का मूल संस्करण सोमवार को जारी किया गया था। हालांकि, 24 घंटों के भीतर ही इसमें संशोधन कर दिया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नरेंद्र मोदी सरकार के दबाव के बाद अमेरिका ने कुछ शर्तों और शब्दों से पीछे हट गया, जिन पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनी थी।

    दाल पर लगने वाले शुल्क पर फंस रहा मामला

    अमेरिका के साथ ट्रेड डील की प्रारंभिक फैक्ट सीट में उल्लेख किया गया था कि भारत कुछ अमेरिकी दालों पर शुल्क कम करेगा या समाप्त कर देगा। इसमें आगे कहा गया है कि भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ को समाप्त या कम करेगा, जिसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (डीडीजी), लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।

    फैक्ट शीट में संशोधित पैराग्राफ में दालों का जिक्र नहीं

    हालांकि, फैक्ट शीट में संशोधित पैराग्राफ में दालों का उल्लेख नहीं है। कृषि आयात, विशेष रूप से दालें, भारत के कृषि क्षेत्र के लिए संवेदनशील हैं और व्यापार समझौते की बातचीत के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहे हैं। इसके अलावा, भारत दालों का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक (वैश्विक उत्पादन का लगभग 25-28%) और उपभोक्ता भी है।

    गौरतलब है कि कुछ महीने पहले, व्यापार वार्ता में गतिरोध के बीच, दो अमेरिकी सीनेटरों ने ट्रंप को पत्र लिखकर भारत पर अमेरिकी दालों पर लगे 30% आयात शुल्क को हटाने का दबाव बनाया था। 1 नवंबर से लागू यह शुल्क, पिछले साल ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% के भारी टैरिफ के जवाब में उठाया गया कदम माना जा रहा था। हालांकि, व्यापार समझौते के तहत इसे अब घटाकर 18% कर दिया गया है।

    दूसरा बड़ा बदलाव प्रस्तावित वस्तुओं की खरीद से संबंधित

    अमेरिकी फैक्ट शीट में दूसरा बड़ा बदलाव भारत द्वारा अमेरिका से प्रस्तावित वस्तुओं की खरीद से संबंधित है। पिछले संस्करण में कहा गया था कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए “प्रतिबद्ध” है। संशोधित संस्करण में “प्रतिबद्ध” शब्द को “इरादा” से बदल दिया गया है – यह एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव है जिसके दूरगामी आर्थिक परिणाम होंगे।

    पिछले फैक्ट शीट के पैराग्राफ में क्या कहा गया था?

    पिछले फैक्ट शीट के पैराग्राफ में कहा गया था कि भारत ने अमेरिकी उत्पादों की अधिक खरीद करने और 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की खरीद के लिए प्रतिबद्धता जताई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि संशोधित संस्करण में “कृषि उत्पादों” का उल्लेख भी हटा दिया गया है।

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