पशुओं का चारा सवालों के घेरे में, अमेरिका संग ट्रेड डील को लेकर भारतीय किसानों की बढ़ी चिंताएं
सवाल: कृषि उत्पादों पर क्या रहा भारत का रुख?
जवाब: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, ‘जो चीजें भारत के लिए संवेदनशील है, जिन्हें किसान पर्याप्त मात्रा में उगाते हैं और जिनमें हम आत्मनिर्भर हैं, उन वस्तुओं को डील से बाहर रखा गया है। कोई छूट नहीं दी गई है।’ उन्होंने कहा, ‘भारत ने अपने हितों और जरूरतों को देखते हुए उन वस्तुओं का मार्केट नपे-तुले ढंग से खोला है, जिनके लिए हम आज भी आयात पर निर्भर है। DDGs के लिए हमारे पशुपालन क्षेत्र के लोगों ने मांग की थी, उनकी जरूरत थी। लिहाजा यह सीमित मात्रा में लाया जाएगा। इसी तरह ऐसी चीजें हैं, जो भारत में पर्याप्त मात्रा में नहीं बनतीं, उनके लिए मार्केट खोलने से कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और उपभोक्ताओं को लाभ होगा। वाइन एंड स्पिरिट्स के लिए बाजार खोला गया है। मिनिमम इंपोर्ट प्राइस भी रखा गया है। बादाम, अखरोट, लेटिल (पीले मसूर जैसी दाल, जो दिखने में अरहर जैसी होती है) जैसी चीजों का आयात UPA के समय से हो रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘कुछ चीजें पर चरणबद्ध ढंग से से टैरिफ घटाया जाएगा और कुछ पर शुरू में ही हटा दिया जाएगा।
सवाल: क्या डेयरी उत्पादों पर भारत ने छूट दी?
जवाब: भारत, अमेरिका के कई खाद्य और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाएगा। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने साफ किया कि डेयरी प्रोडक्ट्स के मामले में किसी भी शर्त के साथ कुछ भी नहीं खोला गया है। कोई भी रियायत नहीं दी गई है। यानी अमेरिकी डेयरी प्रोडक्ट्स का इंपोर्ट नहीं होगा।
सवाल: कपास और सेब पर क्या तय हुआ?
जवाब: गोयल ने कहा कि भारत करीब 6 लाख टन सेब आयात करता है। अमेरिका से भी सेब आता है। अभी 50 रुपये प्रति किलो के मिनिमम इंपोर्ट प्राइस पर आयात होता है और 50% ड्यूटी लगती है। यानी कीमत 75 रुपये किलो से कम नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, ‘अभी अमेरिका से जितना आयात होता है, उससे कम कोटा रखा गया है। है। रियायती ड्यूटी रखी गई है। मिनिमम इंपोर्ट प्राइस 80 रुपये होगा और इस पर 25% ड्यूटी लगेगी। इस तरह फ्लोर प्राइस 100 रुपये प्रति किलो हो जाएगा।’ कपास का भी आयात होता है, खासतौर से एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल कॉटन इसमें भी कोटा आधारित रियायत दी गई है।
सवाल: भारत की और किन चीजों पर अमेरिकी ड्यूटी जीरो?
जवाब: बाइलेटरल ट्रेड डील के तहत अंतरिम समझौता सफलतापूर्वक होने पर भारत से जाने वाली कई चीजों पर अमेरिकी टैरिफ जीरो हो जाएगा। यह अंतरिम समझौता मार्च के मध्य तक हो सकता है। इनमें जेनेरिक दवाएं, जेम्स एंड डायमंड और विमानों के पुर्जे शामिल हैं। ऑटो पार्ट्स पर ड्यूटी जीरो तो नहीं होगी, लेकिन अमेरिका तरजीही टैरिफ रेट कोटा के तहत छूट देगा। गोयल ने कहा कि कुछ ऑटो पार्ट्स पर ड्यूटी जीरो हो जाएगी और कुछ पर 18% रहेगी। प्लैटिनम, एसेंशियल ऑयल, कुछ इनऑर्गेनिक और ऑर्गेनिक केमिकल्स, जिंक ऑक्साइड जैसी चीजों पर ड्यूटी जीरो हो जाएगी।
सवाल: अमेरिका की किन चीजों पर भारत घटाएगा ड्यूटी?
जवाब: अमेरिका से आने वाले सभी इंडस्ट्रियल गुड्स पर भारत का आयात शुल्क खत्म हो जाएगा। कैंसर, हार्ट, न्यूरो डिजीज की दवाओं और बच्चों की कुछ कुछ दवाओं पर भी ड्यूटी खत्म होगी। कॉस्मेटिक्स, ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स, कंप्यूटर से जुड़े प्रोडक्ट्स और मेडिकल उपकरणों सहित ऐसी चीजों का आयात अभी 26 बिलियन डॉलर का है। कुछ उत्पादों पर धीरे-धीरे छूट दी जाएगी।
सवाल: 500 अरब डॉलर का क्या है सवाल?
जवाब: भारत अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के तेल-गैस सहित एनर्जी प्रोडक्ट्स, विमान और विमानों के पुर्जे, गोल्ड सहित कीमती धातुएं, टेक्नॉलजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल खरीदेगा। भारत और अमेरिका ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स के अलावा डेटा सेंटर्स में उपयोग होने वाली दूसरी चीजों का व्यापार बढ़ाएंगे।
सवाल: स्टील और एल्युमीनियम एक्सपोर्ट पर क्या?
जवाब: गोयल ने कहा कि अमेरिका ने सेक्शन 232 के तहत स्टील और एल्युमीनियम पर 50% टैरिफ पूरी दुनिया के लिए लगाया है, उतना ही भारत पर है।
सवाल: तीसरे देश से माल आया तो क्या होगा?
जवाब: दोनों देश रूल्स ऑफ ओरिजिन तय करेंगे। इससे यह पक्का होगा कि केवल भारत में बने माल पर अमेरिका में छूट मिले और केवल अमेरिका में बने माल पर भारत में छूट मिले।
सवाल: रूसी तेल खरीद का क्या?
जवाब: अमेरिका ने 25% पेनल्टी हटा ली है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इग्जेक्यूटिव ऑर्डर में कहा, ‘भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल खरीद बंद करने का वादा किया है। यह वादा भी किया है कि वह अमेरिका से एनर्जी प्रोडक्ट्स खरीदेगा। 25% ड्यूटी लगाते समय अमेरिका ने जो कहा था, उसके मुताबिक भारत ने ‘काफी कदम’ उठाए है, लिहाजा 25% पेनाल्टी खत्म की जा रही है।’ ट्रंप ने यह भी कहा है कि रूस से भारत की तेल खरीद पर अमेरिकी अधिकारी नजर रखेंगे और अगर खरीद होती पाई गई तो फिर से 25% पेनल्टी लगाई जा सकती है और दूसरे एक्शन भी लिए जा सकते हैं।
सवाल: क्या बोला विदेश मंत्रालय?
जवाब: विदेश मंत्रालय ने शनिवार को रूसी तेल के इंपोर्ट पर अपना रुख दोहराया और कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारत की एनर्जी सोर्सिंग में विविधता लाना हमारी रणनीति का मुख्य हिस्सा है। जहां तक भारत की एनर्जी सोर्सिंग का सवाल है, सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक बाजार के हालात और अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के अनुरूप हमारी एनर्जी सोर्सिंग में विविधता लाना इसे सुनिश्चित करने की रणनीति का मूल है। भारत के सभी कार्य इसी बात को ध्यान में रखकर किए जाते हैं और किए जाएंगे।













