Share Market Update: भारत-अमेरिका डील से शेयर बाजार में बहार, सेंसेक्स 2073 अंक उछला, अडानी के शेयरों में तेजी
बाजार में दिखाई देंगे कई अच्छे संकेत
- भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का पैसा भारत से बाहर जाना रुक सकता है और जो पैसा पहले जा चुका है, वो वापस भी आ सकता है।
- भारतीय रुपया हाल में डॉलर के मुकाबले कमजोर हो गया था। यह अब फिर से मजबूत हो सकता है। लोगों का भारतीय शेयर बाजार पर भरोसा बढ़ेगा।
- विदेशी सीधा निवेश (FDI) भी बढ़ेगा।
किन सेक्टर में तेजी की उम्मीद?
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) के अनुसार इस डील का उन सभी सेक्टरों पर कई तरह से अच्छा असर पड़ेगा जो अमेरिका को निर्यात करते हैं। इन सेक्टरों में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां, रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियां, उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली कंपनियां, टेक्सटाइल उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (जैसे फ्रिज, टीवी), IT सेवाएं, वित्तीय सेवाएं (बैंक, बीमा कंपनियां) और यूटिलिटी कंपनियां (बिजली, पानी) शामिल हैं।
इन शेयरों में आ सकती है तेजी
ऑटोमोबाइल्स
- Bharat Forge
- Balkrishna Tyres
टेक्सटाइल/रिटेल
- Raymond Lifestyle
- Indo Count
- Welspun Living
- Gokaldas
- Kitex
कंज्यूमर/कंज्यूमर ड्यूरेबल्स
- LT Foods
- Bluestar
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS)
- Avalon
- Dixon
विदेशी निवेशकों ने निकाल लिया था पैसा
अप्रैल 2024 से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध तनावपूर्ण थे। इस वजह से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारत के प्रति नजरिया खराब हो गया था। उन्हें लगता था कि अमेरिका के सामने भारत की मोलभाव करने की क्षमता कम है। इसी कारण, पिछले एक साल में भारत ने अपने साथियों के मुकाबले लगभग 40% कम प्रदर्शन किया। जनवरी 2025 से FIIs ने भारतीय शेयरों से 22 अरब डॉलर निकाल लिए थे। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स के गिरने के बावजूद, रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 6% कमजोर हो गया था। MOFSL का मानना है कि अब इन सभी नकारात्मक रुझानों के पलटने की संभावना है।
डिस्क्लेमर: इस विश्लेषण में दिए गए सुझाव व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, आज़ाद हिन्द के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श कर लें। क्योंकि शेयर बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।














