यह पांच साल पुरानी पाबंदियों में एक महत्वपूर्ण ढील है। इन पाबंदियों के कारण चीनी कंपनियां भारत के 700 अरब से 750 अरब डॉलर के सरकारी ठेके के बाजार से लगभग बाहर हो गई थीं। जनवरी में रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया था कि भारत चीनी बोलीदाताओं के लिए सरकारी ठेकों में व्यापक छूट पर विचार कर रहा है, क्योंकि सीमा पर तनाव कम हो रहा है। साल 2020 की झड़प के बाद से दिल्ली ने चीनी बोलीदाताओं के लिए एक सरकारी पैनल में रजिस्ट्रेशन कराना और किसी भी सरकारी ठेके के लिए प्रतिस्पर्धा करने से पहले राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया था।
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इस चीज के लिए दी अनुमति
अब भारत ने सरकारी बिजली कंपनियों को चीनी पावर ट्रांसमिशन के एक घटक को सरकार की मंजूरी के बिना आयात करने की अनुमति दे दी है। दो अधिकारियों ने बताया कि कोयला क्षेत्र के महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए भी इसी तरह की समय-सीमा वाली छूट पर विचार किया जा रहा है।
‘राष्ट्रीय हित’ में दी गई छूट
एक अधिकारी ने बताया कि यह छूट ‘राष्ट्रीय हित’ में दी गई है। उनका कहना था कि चीनी आयात को रोकने से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को नुकसान होगा। दो सूत्रों ने बताया कि शीर्ष नौकरशाहों की एक समिति ने इस छूट को मंजूरी दे दी है और जल्द ही एक औपचारिक आदेश जारी होने की उम्मीद है।
दोनों अधिकारियों ने कहा कि यह ढील सरकारी विभागों के बार-बार अनुरोधों के बाद आई है, जो साल 2020 की पाबंदियों के कारण कमी और परियोजना में देरी का सामना कर रहे थे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि भारत पूरी तरह से खरीद फिर से खोलने के बजाय, महत्वपूर्ण चीनी उपकरणों के मामले-दर-मामले आयात की अनुमति दे सकता है।
चीन के बिना भारत कितना अधूरा?
- सीमा पर गतिरोध के बाद से भारत-चीन के तनावपूर्ण संबंधों ने कैपिटल यानी पूंजी, टेक्नोलॉजी और टेलेंट के आदान-प्रदान को धीमा कर दिया है।
- साल 2024 की ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार 2021 में चीनी बोलीदाताओं को नए प्रोजेक्ट अवार्ड्स में पिछले साल की तुलना में 27% की गिरावट आई, जो 1.67 अरब डॉलर था।
- भारत का लक्ष्य साल 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़ना है, लेकिन एग्जीक्यूशन में देरी और ट्रांसमिशन में बाधाएं बनी हुई हैं।
- अगले तीन वर्षों में पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स में ट्रांसफार्मर और रिएक्टरों की लगभग 40% कमी का सामना करना पड़ रहा है।
ड्रैगन को अब छूट ही छूट!
चीन को यह कोई पहली छूट नहीं है। हाल ही में भारत सरकार ने फैसला लिया है कि वह चीन से आने वाले छोटे निवेश को भी अनुमति दे सकती है। दोनों देशों के बीच यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन व्यावसायिक संबंधों को फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह तब हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाया था। हालांकि ट्रेड डील के बाद ट्रंप ने इसे घटाकर 18 फीसदी कर दिया है।













