‘बाजार’ और ‘अंकुश’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं नीशा को भारत की पहली अंग्रेजी टीवी सीरीज ‘अ माउथफुल ऑशो और बाद में फ स्काई’ के लिए याद किया जाता है। हालांकि, एक्टिंग की दुनिया में उनका सफर एक संयोग ही कहा जाता है। सिख परिवार में जन्मी और मालाबार हिल के पॉश इलाके में पली-बढ़ी नीशा के लिए एक्टिंग कभी भी उनकी प्रायॉरिटी नहीं थी।
‘फेयर एंड लवली’ के बुलाया गया
संयोग से ही वो भारती की पहली ‘फेयर एंड लवली’ गर्ल भी बनीं। नीशा को पहला ब्रेक कॉलेज की कैंटीन में किसी ने उन्हें हिंदुस्तान लीवर के एक कैंपेन के लिए वीडियो टेस्ट के लिए बुलाया। जब उन्हें दिग्गज अलीक पद्मसी द्वारा निर्देशित ‘फेयर एंड लवली’ के बुलाया गया तो उन्होंने साफ मना कर दिया। ज्योत्सना मोहन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि शूटिंग खत्म होने के बाद पद्मसी ने नीशा को देखा।
नीशा ने कहा था- मुझे मॉडलिंग करने की इजाज़त नहीं मिलेगी
नीशा ने कहा, ‘उन्होंने मुझसे पूछा कि मैंने टेस्ट क्यों नहीं दिया और मैंने कहा कि मुझे मॉडलिंग करने की इजाज़त नहीं मिलेगी। तो उन्होंने कहा- मुझे कैमरे के लिए बिना मेकअप वाली कोई चाहिए, क्या तुम कैमरे के सामने खड़ी हो जाओगी?’ कुछ दिनों बाद, निर्माता अजय आनंद ने उन्हें बताया कि उनका सिलेक्शन हो गया है। उनके पिता तब तक आश्वस्त नहीं हुए जब तक पद्मसी ने खुद उनसे मिलकर उन्हें आश्वस्त नहीं किया कि उनकी बेटी सुरक्षित हाथों में है।
उ्होंने बताया था- अच्छे ब्रांड मेरे पास आए
नीशा के पिता ने एक सख्त नियम बना दिया था और कहा था- पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने के लिए महीने में सिर्फ एक ऐड करेंगी वो। जल्द ही वो टॉप ब्रैंड्स की फेवरेट बन गईं। उन्होंने कहा था, ‘मेरा प्रमोशन अधिक नहीं हुआ और मैं अच्छे पैसे मांग सकती थी। अच्छे ब्रांड मेरे पास आए – बॉम्बे डाइंग, लैक्मे, नेस्कैफे। आप किसी भी ब्रांड का नाम लें, मैंने उसके लिए काम किया।’
फिल्म ‘कहां कहां से गुजर गया’ में उन्हें परमिशन मिल गई
नीशा सिंह की फिल्मी यात्रा कैसे शुरू हुई? फिल्मों में उनका करियर भी संयोग से ही शुरू हुआ। पृथ्वी थिएटर जाने के बाद फिल्म मेकर एमएस सथ्यू से मुलाकात हुई। एक्ट्रेस ने उन्हें भी कहा कि मुझे फिल्म की इजाजत नहीं मिलेगी।’ वह हंसते हुए कहती हैं। उनकी फिल्म ‘गरम हवा’ देखने के बाद, उन्होंने अपने पिता से खूब मिन्नतें कीं और आखिरकार अनिल कपूर के साथ फिल्म ‘कहां कहां से गुजर गया’ में उन्हें परमिशन मिल गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता मिली
फिल्म को घरेलू स्तर पर पर नहीं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता मिली। फिर सागर सरहदी की फिल्म ‘बाजार’ (1982) आई। मुश्किल से 18 साल की नीशा ने यह सोचकर फिल्म में काम किया कि वह एक लीड एक्ट्रेस हैं लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि ये साइड रोल है।
‘तुम्हें क्या लगता है कि कोई तुम्हें क्यों लेगा?’
कहते हैं कि फिल्म ‘बाजार’ की शूटिंग के दौरान, स्मिता पाटिल ने उन्हें दक्षिण मुंबई की छवि के बारे में खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने बताया था, ‘मैंने स्मिता से कहा कि मैं यह आर्ट फिल्म करना चाहती हूं,और उन्होंने कहा, ‘तुम्हें क्या लगता है कि कोई तुम्हें क्यों लेगा? तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज गलत है। तुममें सब कुछ गलत है।’ यहां तक कि श्याम बेनेगल ने भी उनसे कहा कि वह उनकी गांव की कहानियों के लिए एक ‘राजकुमारी’ जैसी दिखती हैं – लेकिन सालों बाद उन्होंने उन्हें ‘भारत एक खोज’ में राजकुमारी संजुक्ता के रूप में कास्ट किया।
नाना पाटेकर को पहली नजर में नापसंद
कहते हैं कि एन. चंद्रा की फिल्म ‘अंकुश’ ने ही उनकी असली परीक्षा ली। उनके को-स्टार थे नाना पाटेकर। कहते हैं कि वो शुरू में ही उनकी कास्टिंग से हैरान थे। उन्होंने कहा, ‘नाना ने मुझे देखते ही नापसंद कर दिया था।’ नीशा ने कहा था, ‘उन्होंने चंद्रा की तरफ देखा और मराठी में कहा- क्या तुम पागल हो? तुम इस लड़की को कैसे ले सकते हो?’ लेकिन तीसरे दिन, उसके रिएक्शन शॉट्स देखने के बाद, उन्होंने उसके सिर पर थपथपाया और कहा- चल जाएगी तू।
अपने चरम पर, वह गायब हो गईं
हालांकि नीशा जानती थीं कि वो उस समय के मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा के सांचे में फिट नहीं बैठती थीं। 90 के दशक के मध्य तक, नीशा सिंह ने टेलीविजन की ओर रुख कर लिया था। ‘बुनियाद’ और बाद में ‘अ माउथफुल ऑफ स्काई’ जैसे शो में नजर आईं। फिर, 1997 में, अपने चरम पर, वह गायब हो गईं। उन्होंने बताया था, ‘मेरी शादी हुई और मैं रातोंरात सिंगापुर चली गई। मेरे एक-दो सीरियल चल रहे थे, जिनमें से कुछ में मुझे हटाना पड़ा या गायब करना पड़ा।’













