इन आशंकाओं के बीच भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर नई दिल्ली में चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत के आधे से अधिक जहाजी तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक जलक्षेत्र से होकर गुजरते हैं, जो ओमान और ईरान के बीच एक समुद्री मार्ग है और खाड़ी देशों के कच्चे तेल निर्यातकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण जरिया है।
ऐसे में अगर ईरान होर्मुज को बंद कर देता है तो भारत और चीन का तेल आयात काफी प्रभावित हो सकता है और पेट्रोलियम की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस पर छपी एक खबर के अनुसार, इससे पहले बुधवार को ही अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में सात महीने का उच्चतम स्तर देखने को मिला था। भारतीय समयानुसार बुधवार दोपहर 2:44 बजे ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स 71.60 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 66.45 डॉलर प्रति बैरल पर था।
भारत का 50 फीसदी ऑयल इंपोर्ट होर्मुज के रास्ते से
- द प्रिंट की एक खबर के अनुसार, कमोडिटी ट्रैकिंग फर्म केप्लर के आंकड़ों से पता चलता है कि कच्चे तेल के कुल आयात में भारत की निर्भरता इस होर्मुज चोकपॉइंट पर बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो गई है और हाल के महीनों में इसमें बढ़ोतरी हुई है।
- इस साल 24 फरवरी तक भारत ने खाड़ी देशों से लगभग 2.6 मिलियन बैरल प्रति दिन (एमबीपीडी) तेल का आयात किया है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों में खाड़ी देशों की आपूर्ति की अहमियत को बताता है। यही वजह है कि भारत ने खाड़ी के देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है।
होर्मुज के रास्ते से भारत की ओर आता है ज्यादातर कच्चा तेल
- द मर्चेंट के फाउंडर जैक प्रांडेली के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे गंभीर तेल चोक पॉइंट है। इस संकरे कॉरिडोर से पूरी दुनिया का करीब 20 फीसदी क्रूड ऑयल गुजरता है।
- यहां पर कच्चे तेल का प्रवाह मुख्य रूप से खाड़ी उत्पादक देशों सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर से होता है और यह पूर्व की ओर चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख एशियाई उपभोक्ताओं की ओर बढ़ता है।
होर्मुज बंद हुआ तो भारत के तेल आयात बिल पर बढ़ेगा बोझ
- अमेरिका स्थित ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, 2024 में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का 69 प्रतिशत हिस्सा इन उपभोक्ताओं का था।
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केप्लर में रिफाइनिंग और मॉडलिंग के प्रमुख विश्लेषक सुमित रितोलिया ने के अनुसार, होर्मुज में किसी भी प्रकार की बाधा से ऑयल सप्लाई में कमी, माल ढुलाई और बीमा लागत में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों पर बोझ बढ़ सकता है। इससे भारत के तेल आयात बिल पर असर पड़ेगा।
90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है भारत
- क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपने कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85-90 प्रतिशत आयात करता है। इसके लिए किसी भी प्रकार की आपूर्ति बाधित होने के गंभीर परिणाम होंगे।
- भले ही भौतिक आपूर्ति बेरोकटोक बनी रहे मगर भू-राजनीतिक जोखिम के कारण कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से देश का आयात बिल बढ़ सकता है।
होर्मुज बंद होने से भारत और चीन दोनों प्रभावित
- मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी से कच्चे तेल की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की रुकावट की भरपाई किसी दूसरे सोर्स से करना असंभव है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति में इसका योगदान 18 से 20 प्रतिशत है।
- अगर होर्मुज का रास्ता रुक जाता है, तो तेल की कमी न केवल भारत बल्कि चीन सहित बाकी दुनिया को भी प्रभावित करेगी। ऐसी किसी भी रुकावट से वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में भारी कमी आएगी, जिससे तेल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाएंगी।
भारत तेल आयात के लिए कई देशों से मंगा रहा है
- वेबसाइट विजुअल कैपिटलिस्ट के मुताबिक, भारत ने हाल के वर्षों में अपनी तेल आपूर्ति में विविधता लाई है। भारत हाल वर्षों से अपना तेल आयात रूस, इराक, सऊदी अरब, यूएई, पश्चिम अफ्रीका, दक्षिण और मध्य अमेरिका, अमेरिका, कुवैत, मध्य पूर्व के बाकी देश, मैक्सिको, यूरोप ऊत्तरी अफ्रीका, एशिया प्रशांत और कनाडा से मंगाता रहा है।
- एनर्जी इंस्टीट्यूट के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने कुल तेल आयात में से करीब 37 फीसदी रूस से मंगाया। वहीं, 21 फीसदी के साथ इराक दूसरे नंबर पर है।
- हालांकि, सबसे बड़ी चिंता आपूर्ति नहीं बल्कि कीमतों में अस्थिरता है। उन्होंने कहा-तेल की ऊंची कीमतों का घरेलू अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से मुद्रास्फीति यानी महंगाई पर प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से ईंधन, परिवहन और रसद लागतों के माध्यम से यह महंगाई और बढ़ सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की दुनिया के लिए क्या है
- ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य, मध्य पूर्व खाड़ी के कच्चे तेल निर्यातकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में काम करता है।
- होर्मुज दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल ढोने वाले जहाजों के लिए काफी अच्छा रास्ता है, क्योंकि ये पर्याप्त गहरा और चौड़ा है। इसे वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण तेल रास्तों में से एक माना जाता है।
- वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का एक चौथाई और कुल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खपत का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। EIA के अनुसार, अकेले 2025 की पहली तिमाही में लगभग 20.1 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडॅक्ट का इस जलमार्ग से आवागमन हुआ।
तो भारत के लिए आखिर रास्ता क्या है
- पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE ) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाईपास करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया है। सऊदी अरामको 5 मिलियन प्रति दिन की क्षमता वाली पूर्व-पश्चिम कच्चे तेल पाइपलाइन का संचालन करती है, जो अब्कैक तेल प्रसंस्करण केंद्र से लाल सागर पर स्थित यानबू बंदरगाह तक जाती है।
- वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ओमान की खाड़ी में स्थित फुजैराह निर्यात टर्मिनल को तटवर्ती तेल क्षेत्रों से जोड़ने वाली 1.8 मिलियन प्रति दिन की क्षमता वाली पाइपलाइन का भी उपयोग करता है, जो व्यवधान की स्थिति में सीमित वैकल्पिक मार्ग प्रदान करती है।
- भारत ने हाल के वर्षों में यूएई और ओमान के साथ अपने द्विपक्षीय संबंध मजबूत किए हैं। अगर ऐसी कोई आपात स्थिति पैदा होती है तो अपने तेल टैंकरों को ओमान और यूएई के समंदर से रास्ता मांग सकता है। हालांकि, इन प्रक्रियाओं से तेल सप्लाई में देरी के साथ-साथ लागत भी बढ़ सकता है।
- 10 दिसंबर, 2025 को भारत और ओमान के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। ओमान की राजधानी मस्कट में कॉम्प्रीहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर दस्तखत हुए। इसे भारत और ओमान दोनों के लिए रणनीतिक रूप से द्विपक्षीय ट्रेड और आर्थिक सहयोग की मजबूती के रूप मे देखा जाता है।













