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  • भारत के खिलाफ टैरिफ वॉर से क्या ट्रंप की पार्टी में बढ़ गई हैं दरारें? कैसे सीनेटर के ऑडियो लीक से अमेरिका में मचा बवाल

    नई दिल्ली: यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस तरह से भारत पर टैरिफ लगाए हैं उसे लेकर अमेरिका में घमासान जारी है। कई सीनेटर्स इस पर सवाल खड़े कर चुके हैं। इस बीच एक अमेरिकी सीनेटर के लीक ऑडियो से हड़कंप मच गया है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत


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    By Azad Hind Desk जनवरी 26, 2026
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    नई दिल्ली: यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस तरह से भारत पर टैरिफ लगाए हैं उसे लेकर अमेरिका में घमासान जारी है। कई सीनेटर्स इस पर सवाल खड़े कर चुके हैं। इस बीच एक अमेरिकी सीनेटर के लीक ऑडियो से हड़कंप मच गया है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत के बीच एक यूएस सीनेटर की कथित तौर पर ऑडियो रिकॉर्डिंग लीक हुई है। इसमें ये खुलासा हुआ है कि आखिर भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कौन रुकावट पैदा कर रहा है। खास बात ये है कि इसमें ट्रंप का भी नाम जुड़ रहा है। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति के दो सिपहसालार के भी नाम इस ऑडियो लीक में सामने आए हैं। जिस तरह से पूरा मामला सामने आया इससे सवाल उठ रहे कि क्या भारत संग टैरिफ वॉर से ट्रंप की पार्टी में दरारें बढ़ गई हैं?

    अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज का दावा

    पूरा मामला तब सामने आया जब प्रमुख अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज ने कथित तौर पर व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का नाम लिया। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी भारत के साथ व्यापार समझौते को रोकने का आरोप लगाया है। यह बात उन्होंने डोनर्स के साथ हुई फोन कॉल में कही है। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, एक लीक हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, टेक्सस के रिपब्लिकन सीनेटर ने अपने समर्थकों को बताया कि वह भारत के साथ व्यापार समझौता कराने के लिए व्हाइट हाउस से ‘संघर्ष’ कर रहे हैं।

    ऑडियो लीक में इंडिया-यूएस डील पर खुलासा

    Axios की यह रिपोर्ट भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के बीच आई है, जो कई महीनों से जारी हैं। इस ट्रेड वार्ता को तब और अधिक महत्व मिला जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ तेल व्यापार करने पर भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, जिससे टोटल टैरिफ 50 फीसदी हो गया था।

    क्या टैरिफ वॉर से ट्रंप की पार्टी में बढ़ी दरारें?

    ये रिपोर्ट भारत-अमेरिका ट्रेड डील में आ रही राजनीतिक बाधाओं को उजागर करती है। यह सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को भी दर्शाती है। ट्रंप के सत्ता में आने से पहले, रिपब्लिकन पार्टी पारंपरिक रूप से फ्री ट्रेड की समर्थक रही है। टेड क्रूज ने डोनर्स को यह भी बताया कि उन्होंने और कई अन्य रिपब्लिकन सीनेटरों ने पिछले साल अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप को दुनिया भर के देशों पर ‘लिबरेशन डे टैरिफ’ लगाने से रोकने की कोशिश की थी।

    क्रूज ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा था कि इससे टैरिफ कीमतें बढ़ सकती हैं और अमेरिकी लोगों के रिटायरमेंट सेविंग्स को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि इससे रिपब्लिकन पार्टी 2026 के मध्यावधि चुनावों में हाउस और सीनेट दोनों हार सकती है।

    कौन हैं टेट क्रूज, ट्रंप प्रशासन पर उठाए सवाल

    टेट क्रूज को 2028 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर दावेदारी करने वाला माना जा रहा है। ऐसा इसलिए जिससे पार्टी पर ट्रंप और वेंस के नियंत्रण को चुनौती दी जा सके। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख रिपब्लिकन 2026 के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी से पिछड़ने की संभावना के बारे में भी चिंतित हैं। अमेरिकी सीनेटर ने दिल्ली-वाशिंगटन के बीच संबंधों पर भी अपनी बात रखी है। सीनेटर क्रूज जो 2016 में राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बनने की रेस में ट्रंप से पिछड़ गए थे, वो भारत के साथ घनिष्ठ संबंधों के समर्थक भी रहे हैं।

    भारत का दौरा कर चुके हैं टेट क्रूज

    2019 में भारत की यात्रा के दौरान क्रूज ने कहा था कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक सहयोगी हैं। हम तेजी से एक साथ काम कर रहे हैं। भारत इस धरती पर सबसे बड़ा लोकतंत्र है। हम टेक्सास के महान राज्य में रहने वाले आधे मिलियन से अधिक भारतीय-अमेरिकियों का आशीर्वाद पाकर धन्य हैं। उन्होंने आगे कहा था कि हम सामान्य हितों और मूल्यों को साझा करते हैं, जिसमें मानवाधिकारों, मुक्त बाजारों और निष्पक्ष वाणिज्य के लिए खड़े होना शामिल है।

    क्रूज ने कहा कि हमारे सामान्य प्रतिद्वंद्वी भी हैं, जबकि चीन ने अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है, भारत ने अपने अर्थव्यवस्था को चीन के अधीन होने से रोका है, और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्षेत्र से परे देखा है। चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने में हमारी साझेदारी महत्वपूर्ण है। यह बात उन्होंने उसी यात्रा के दौरान कही थी, जब वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले थे।

    यूएस सीनेटर क्रूज के दावे से ट्रेड डील पर क्या होगा असर?

    टेट क्रूज का ये दावा बेहद अहम है। खास तौर पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता सिर्फ आर्थिक मामला नहीं है, बल्कि इसमें अमेरिकी राजनीति की जटिलताएं भी शामिल हैं। सीनेटर क्रूज जैसे नेता, जो भारत के साथ मजबूत संबंधों के पक्षधर हैं, व्हाइट हाउस के भीतर के विरोध से जूझ रहे हैं। यह स्थिति उन व्यापारियों और कंपनियों के लिए चिंता का विषय है जो दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये आंतरिक राजनीतिक मतभेद भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर कुछ असर डालेगा?

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