सीएनएन न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रचंड और डोभाल के बीच बातचीत में मुख्य फोकस इस बात पर था कि आम चुनाव होना ही देश के राजनीतिक संक्रमण का मूलभूत हल है। यह बैठक बेहद संवेदनशील समय में हो रही है जब जेन जेड प्रदर्शन के बाद केपी शर्मा ओली की सरकार गिर चुकी है। वहीं सुशील कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाल रखा है। सूत्रों का कहना है कि यह चर्चा तब हुई है जब नेपाल में चुनाव का ऐलान हो चुका है। उन्होंने कहा कि अजीत डोभाल ने सुझाव दिया कि वर्तमान राजनीतिक संकट को खत्म करने के लिए नेपाल को तत्काल चुनाव की ओर बढ़ना चाहिए।
नेपाल के लोकतंत्र का भारत ने खुलकर किया समर्थन
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में डोभाल ने भारत का रुख साफ कर दिया कि ये चुनाव न केवल प्रक्रियागत जरूरत है, बल्कि राष्ट्रीय स्थिरता के लिए बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के लोकतांत्रिक ढांचे के संरक्षण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। डोभाल ने कथित रूप से प्रचंड से यह भी कहा कि चुनाव ही राजनीतिक सिस्टम को बनाए रखने का एकमात्र तरीका है। भारत अपने पड़ोस में राजनीतिक स्थिरता चाहता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के जरिए लोकतांत्रिक बहुमत हासिल करना लोकतंत्र को बचाए रखने का सबसे अच्छा विकल्प है।
भारत के नेपाल में चुनाव पर जोर दिए जाने पर प्रचंड ने आश्वासन दिया कि देश में इसको लेकर आंतरिक सहमति है। प्रचंड ने डोभाल से कहा कि राजनीतिक दल चुनाव का विरोध नहीं कर रहे हैं। बता दें कि प्रचंड ने भारत आने से पहले नेपाल के अंदर केपी शर्मा ओली के साथ उच्च स्तरीय विचार विमर्श किया था। इससे पता चलता है कि उन्होंने भारतीय नेतृत्व से बातचीत से पहले नेपाल के राजनीतिक दलों से राय ली थी। प्रचंड के साथ उनकी बेटी गंगा भी मौजूद थीं। नेपाल में बालेन शाह चुनावी मैदान में उतर रहे हैं जो काठमांडू के मेयर हैं और माना जा रहा है कि जेन जेड की ओर से वही उम्मीदवार होंगे। इससे ओली और प्रचंड के पीएम पद के दावेदारी को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। यही नहीं देश में राजतंत्र को फिर से बहाल करने की मांग हो रही है।














