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  • भारत के दोस्त रूस की जमीन पर पाकिस्तान की नापाक चाल, ISI ने मॉस्को में बनाई सीक्रेट सेल, जानें प्लान

    मॉस्को: दुनिया में बदलते वर्ल्ड ऑर्डर के बीच भारत के दोस्त रूस के भीतर एक बहुत ही गहरा खेल चल रहा है। द्विपक्षीय सहयोग की आड़ में दो विदेशी खुफिया एजेंसियों ने मॉस्को में अपना सीक्रेट सेल शुरू किया है। रिपोर्ट से पता चलता है कि तुर्की और पाकिस्तान ने रूस में अपने राजनयिक मिशनों


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    By Azad Hind Desk फरवरी 16, 2026
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    मॉस्को: दुनिया में बदलते वर्ल्ड ऑर्डर के बीच भारत के दोस्त रूस के भीतर एक बहुत ही गहरा खेल चल रहा है। द्विपक्षीय सहयोग की आड़ में दो विदेशी खुफिया एजेंसियों ने मॉस्को में अपना सीक्रेट सेल शुरू किया है। रिपोर्ट से पता चलता है कि तुर्की और पाकिस्तान ने रूस में अपने राजनयिक मिशनों के अंदर चुपके से खुफिया यूनिट्स को शामिल कर लिया है। ब्लिट्ज की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की ने मॉस्को स्थित अपने दूतावास के अंदर एक खुफिया सेल बनाया है। इसके साथ ही पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने कथित तौर पर मैट्रियोश्का डेस्क नाम की स्पेशल ऑपरेशनल यूनिट बनाई है।

    पाकिस्तान हाल के दिनों में रूस से करीबी बढ़ा रहा है। दोनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में तेजी आई है। हालांकि, नवभारत टाइम्स के आकलन से पता चलता है कि इस बार पाकिस्तानी यूनिट के इरादे कहीं ज्यादा खतरनाक हैं। इसके मकसद में रूसी खुफिया सिस्टम में घुसने से लेकर विदेशों में मौजूद रूसी खुफिया एसेट्स के बारे में जानकारी जुटाना शामिल है।

    मुनीर के निर्देश पर बनी सीक्रेट यूनिट

    सूत्र बताते हैं कि ISI की खुफिया डेस्क मेट्रियोश्का को इसी साल जनवरी में आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर के निर्देश के बाद शुरू किया गया था। कथित तौर पर ये निर्देश वॉशिंगटन में CIA से जुड़े अधिकारियों बातचीत के बाद दिए गए थे। इस यूनिट का संचालन ब्रिगेडियर आसिफ खान और दो अन्य अधिकारी कर रहे हैं। इस यूनिट का एक खतरनाक मकसद रूसी मिलिट्री, इंटेलिजेंस, मीडिया और एलीट सर्कल से लोगों को भर्ती करना है। कुछ रिपोर्ट्स तो यहां तक कहती हैं कि इसके निशाने पर राष्ट्रपति पुतिन भी हैं।

    पाकिस्तान की लंबी तैयारी

    पाकिस्तान की यह यूनिट अचानक नहीं बनी है, बल्कि इसके पीछे लंबी तैयारी शामिल है। ISI के पास ऑपरेटिव्स का एक नेटवर्क तैयार है, जिन्हें भर्ती और रैडिकलाइजेशन ऑपरेशन के लिए रूस में तैनात किया जा सकता है। इनमें से कुछ ऑपरेटिव अच्छी रूसी बोलते हैं, जो आसानी से स्थानीय समाज में मिल सकते हैं।

    मॉस्कों में पाकिस्तानी खुफिया सेल के मायने?

    ब्लिट्स के एडिटर और सुरक्षा एक्सपर्ट सलाह उद्दीन शोएब चौधरी इसे एक खतरनाक संकेत के रूप में देखते हैं। उनका मानना है-

    • खुफिया सेल का सामने आना जियोपॉलिटिकल चेसबोर्ड के तौर पर मॉस्को की बदलती भूमिका को दिखाता है।
    • रूस आज पश्चिम के साथ खराब रिश्तों, यूक्रेन में लंबे समय से चल रहे संघर्ष, यूरेशिया में बदले अलायंस से जूझ रहा है।
    • इस स्थिति को विदेशी इंटेलिजेंस सर्विसेज स्ट्रेटेजिक लेवरेज को आगे बढ़ाने के मौके रूप में देख सकती हैं।
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