CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में गाजियाबाद देश के सबसे प्रदूषित शहर रहा। जहां पर PM2.5 स्तर 184 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय सीमा से तीन गुना अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस शहर में पूरे महीने हर दिन प्रदूषण के दैनिक मानकों को नजरअंदाज किया गया। गाजियाबाद के बाद दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा देश के सबसे प्रदूषित शहर रहे। दिल्ली में जनवरी के महीने में 27 दिन वायु गुणवत्ता बहुत खराब या गंभीर कैटेगरी में रही।
WHO के मानकों पर खरा नहीं उतर सका कोई भी शहर
प्रदूषण के मामले में टॉप 10 शहरों में धरूहेड़ा छठे स्थान पर रहा, जबकि सिंगरौली, भिवाड़ी, नार्नौल और गंगटोक भी इस लिस्ट में शामिल रहे। इनमें से छह शहर उत्तर प्रदेश और हरियाणा के हैं। 248 शहरों के आंकड़ों में से 123 शहरों में PM2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से अधिक पाया गया। वहीं, कोई भी शहर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) से जुड़े 97 शहरों में से 46 ने मानकों का उल्लंघन किया, जबकि गैर-NCAP शहरों में 77 शहर राष्ट्रीय सीमा से ऊपर और सभी 151 शहर वैश्विक मानकों से ज्यादा प्रदूषित पाए गए।
देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित 10 शहर
- गाजियाबाद
- दिल्ली
- नोएडा
- गुरुग्राम
- ग्रेटर नोएडा
- धरूहेड़ा
- सिंगरौली
- भिवाड़ी
- नार्नौल
- गंगटोक
राज्यों में नियमों के पालन की बात करें तो राजस्थान सबसे ऊपर रहा, जहां 34 में से 23 शहरों में प्रदूषण मानकों का पालन नहीं हुआ। इसके बाद हरियाणा, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश का स्थान रहा।
देशभर के केवल 21 शहरों में साफ हवा
देशभर में केवल 21 शहरों में हवा ‘अच्छी’ रही, 103 ‘संतोषजनक’, 92 ‘मध्यम’, जबकि 32 शहर ‘खराब’ या ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहे। मध्य प्रदेश का दमोह सबसे साफ शहर रहा, जहां औसत PM2.5 स्तर 17 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। सबसे साफ 10 शहरों में से पांच कर्नाटक में हैं। महानगरों में दिल्ली और कोलकाता ने मानकों को पार किया, जबकि चेन्नई, मुंबई और बेंगलुरु सीमा के भीतर रहे।













