पहला प्रोजेक्ट Feko Pay रहा, जिसे दिल्ली के शहीद भगत सिंह ईवनिंग कॉलेज के छात्र हार्दिक सचान ने बनाया। कैंपस कैफे में दोस्तों के साथ बैठकर खाने के बाद सबसे बड़ी टेंशन होती है बिल बांटने की। कौन कितना देगा, किसने अभी तक पैसे नहीं भेजे, इसी झंझट को हार्दिक ने खत्म करने की कोशिश की। उनका ऐप बिल की फोटो स्कैन करता है, हर आइटम को पहचानता है और अपने आप सबका हिस्सा तय कर देता है। हार्दिक बताते हैं कि Gemini ने उन्हें आइडिया क्लियर करने, ऐप का लुक सोचने और प्रेजेंटेशन को दमदार बनाने में काफी मदद की।
इधर-उधर पड़ा सामान हो गया यूजफुल
दूसरा प्रोजेक्ट Swappr है, जो जयपुर के MNIT के छात्र गर्वित दुडेजा का आइडिया है। गर्वित ने देखा कि हॉस्टल के कमरों में ढेर सारा महंगा सामान ऐसे ही पड़ा रहता है, जैसे गिटार, किताबें, इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट। ये किसी और के काम आ सकते हैं। इसी सोच से उन्होंने एक ऐसा प्लैटफॉर्म बनाया, जहां छात्र अपने ही कैंपस के अंदर सामान आपस में एक्सचेंज कर सकते हैं। यह प्रोजेक्ट थोड़ा गेम जैसा है, जहां स्वाइप करके डील होती है। गर्वित कहते हैं कि Gemini ने उनके बिखरे हुए विचारों को एक स्ट्रक्चर दिया और आइडिया को सही रास्ते पर आगे बढ़ाया।
जूनियर्स तक पहुंचे पुराने प्रोजेक्ट
तीसरा और सबसे अलग आइडिया Rest In Pieces का रहा, जिसे तमिलनाडु के सलेम की छात्रा भावना एल. ने तैयार किया। भावना ने कॉलेज लैब्स में एक आम समस्या देखी- सीनियर्स के पुराने प्रोजेक्ट्स, रोबॉट और सेंसर ग्रैजुएशन के बाद बेकार हो जाते हैं। वहीं जूनियर्स को वही चीजें महंगे दामों पर खरीदनी पड़ती हैं। भावना का प्लैटफॉर्म पुराने प्रोजेक्ट्स से हार्डवेयर को पहचानता है और उन्हें दोबारा इस्तेमाल लायक बनाकर जूनियर्स तक पहुंचाता है। भावना के मुताबिक, Gemini ने रिसर्च करने और आइडिया को असरदार तरीके से पेश करने में अहम भूमिका निभाई।
टॉप 3 ही नहीं, इनके प्रोजेक्ट भी शानदार
गूगल Gemini सिर्फ टॉप 3 ही नहीं, बल्कि बाकी फाइनलिस्ट्स के लिए भी एक मजबूत थिंकिंग पार्टनर साबित हुआ। देश के अलग-अलग शहरों से आए इन छात्रों ने Gemini की मदद से अपने यूनिक आइडियाज को आकार दिया और उन्हें आगे बढ़ाया।
1. पी. एस. साई. विकास (बेंगलुरु)
विकास ने 24×7 प्रिंटआउट ऑटोमैटिक मशीन बनाया। Gemini ने उन्हें यह समझने में मदद की कि मशीन कैसे काम करेगी, कहां लगेगी और स्टूडेंट्स इसे आसानी से कैसे इस्तेमाल कर पाएंगे।
2. देविका मुकुंदन (त्रिशूर)
कैंटीन में बचने वाले खाने की समस्या को हल करने के लिए मुकुंदन ने 6 महीने का डेटा Gemini की मदद से एनालाइज किया। इसके बाद पता चल गया कि किस दिन कौन सी डिस किस मात्रा में बनानी चाहिए।
3. शिवम सैनी (पानीपत)
शिवम ने देखा कि कॉलेज स्टूडेंट्स को रोजाना सफर में काफी दिक्कतें आती हैं। इसी समस्या से उनका स्टूडेंट ट्रैवल नेटवर्क आइडिया निकला। इस नेटवर्क में स्टूडेंट्स आपस में ट्रैवल ऑप्शंस शेयर कर सकते हैं और एक सुरक्षित, किफायती सिस्टम बना सकते हैं।
4. हर्षल अशोक सूर्यवंशी (कोल्हापुर)
हर्षल ने कॉलेज हॉस्टल और कैंपस में आउट-पास सिस्टम की जटिल प्रक्रिया को नोटिस किया। बार-बार फॉर्म भरना, अप्रूवल का इंतजार और कन्फ्यूजन- इसी से उनका डिजिटल आउट-पास सिस्टम आइडिया सामने आया। इस सिस्टम में स्टूडेंट्स मोबाइल से आउट-पास रिक्वेस्ट कर सकते हैं और अथॉरिटी उसे डिजिटल तरीके से अप्रूव कर सकती है।
5. आदित्य राव (चेन्नै)
आदित्य का आइडिया थोड़ा अलग और अडवांस टेक्नोलॉजी से जुड़ा है। उन्होंने रोबॉटिक मंकी हनीपॉट का कॉन्सेप्ट तैयार किया, जो खेतों और रिहायशी इलाकों में बंदरों से होने वाले नुकसान को कम कर सकता है। यह सिस्टम रोबॉट और सेंसर की मदद से बंदरों को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें दूर रखने का तरीका सुझाता है।
6. डैनी मैथ्यू (वैकोम) और ईश्वर आनंद बदुगु (राजकोट)
डैनी और ईश्वर दोनों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट्स में रिसर्च आधारित समस्याओं पर काम किया। उन्होंने Gemini की मदद से बड़े और जटिल रिसर्च डेटा को समझा, जरूरी पॉइंट्स निकाले और अपने आइडियाज के मॉक-अप्स तैयार किए। इससे उनके प्रोजेक्ट सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि देखने-समझने लायक प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस में बदल पाए।














