चीन भारत से जीरा और मिर्च खरीदकर उन्हें अपने यहां प्रोसेस कर करके तीसरे देशों को बेच रहा है। इसके बावजूद उसके मसाले सस्ते पड़ रहे हैं। बिग हाट के वाइस प्रेसिडेंट संदीप वोडेपल्ली ने कहा कि पिछले दो साल से चीन जीरे और मिर्च की खेती कर रहा है और कुछ बाजारों में भारत की जगह ले रहा है। मिर्च को भारत के मसाला निर्यात की रीढ़ माना जाता है। वॉल्यूम और वेल्यू के लिहाज से भारत के कुल मसाला निर्यात का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा मिर्च का होता है।
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मिर्च का एक्सपोर्ट
2024-25 में भारत से मिर्च पाउडर का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 35% बढ़कर 80.6 मिलियन किलो हो गया। वहीं, कुल मिर्च निर्यात 19% बढ़कर 700,000 टन से ज्यादा रहा। लेकिन इस दौरान निर्यात से होने वाली कमाई 11% कम हो गई। इससे साफ है कि कीमतों पर भारी दबाव है। 2023-24 में भी मिर्च का निर्यात 15% बढ़ा था।
इस दौरान जीरा निर्यात में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। 2024-25 में जीरे का निर्यात पिछले साल के 165,269 टन से 39% बढ़कर 229,881 टन हो गया।
कारोबारियों का कहना है कि चीन दो तरह की मिर्च पर खास ध्यान दे रहा है। इनमें पैपरिका और तेजा शामिल हैं। पैपरिका का इस्तेमाल रंग और हल्के फ्लेवर के लिए होता है। मिर्च की तेजा किस्म काफी तीखी होती है। इसका यूज दर्द निवारक मलहम जैसी दवाओं में होता है।
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गिर गया रकबा
बल्क एक्सपोर्टर प्रकाश अग्रवाल ने कहा, “इस बदलाव का असर अगले दो सीजन में दिखने लगेगा।” मौसम की मार और निर्यात बाजार में कम दाम की वजह से किसान खरीफ सीजन में मिर्च और जीरा की खेती करने से कतरा रहे हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे मुख्य उत्पादक राज्यों में मिर्च की खेती का रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 35% कम हो गया है। वहीं, जीरे की खेती का रकबा 7-8% घटा है।












