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  • भारत को S-400 एयर डिफेंस के लिए ‘स्टील्थ किलर’ रडार देगा रूस, जानें कैसे चीनी J-20 का डर होगा खत्म

    मॉस्को: रूस भारत को अपने एडवांस 98L6E ‘Yenisei’ AESA मल्टी-मोड फायर-कंट्रोल रडार सिस्टम की पेशकश कर सकता है। इसे भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के साथ इंटीग्रेट किया जा सकता है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह रडार खास तौर पर स्टील्थ फाइटर जेट्स जैसे अमेरिकी F-35 लाइटनिंग-II, चीनी J-20 फाइटर


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    By Azad Hind Desk जनवरी 7, 2026
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    मॉस्को: रूस भारत को अपने एडवांस 98L6E ‘Yenisei’ AESA मल्टी-मोड फायर-कंट्रोल रडार सिस्टम की पेशकश कर सकता है। इसे भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के साथ इंटीग्रेट किया जा सकता है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह रडार खास तौर पर स्टील्थ फाइटर जेट्स जैसे अमेरिकी F-35 लाइटनिंग-II, चीनी J-20 फाइटर जेट और चीनी J-35A स्टील्थ फाइटर जेट को ट्रैक कर सकता है। यानि एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम आसानी से दुनिया के तमाम एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट्स को मार गिरा सकेगा। भारत के लिए ये प्रस्ताव काफी अहम हो सकता है, क्योंकि चीन के पास दो तरह के स्टील्थ फाइटर हैं, जिनमें से J-35A पाकिस्तान खरीद सकता है।

    Yenisei रडार में 400 किलोमीटर तक की रेंज और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेज़र्स (ECCM) क्षमता है, जिससे भारत की मौजूदा S-400 रेजीमेंट्स की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता पूरी दुनिया देख चुकी है, जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तान के अवाक्स विमान को मार गिराया था।

    98L6E येनिसेई रडार की क्षमता क्या है?
    98L6E येनिसेई रडार एक AESA यानि Active Electronically Scanned Array आधारित सिस्टम है। इसमें मल्टी-बैंड और मल्टी-फ्रीक्वेंसी ऑपरेशन को अंजाम देने की क्षमता है। जबकि स्टील्थ फाइटर जेट आमतौर पर X-बैंड रडार से बचने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, लेकिन येनिसेई का मल्टी-स्पेक्ट्रम क्षमता, उन्हें कम रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) के बावजूद उन्हें ट्रैक करने की क्षमता देता है। अगर इसे S-400 के मौजूदा सेंसर नेटवर्क से जोड़ दिया जाता है, तो ये पहले के मुकाबले ज्यादा दूरी तक और पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता के साथ आकाशीय खतरों को ट्रैक कर सकेगा। टारगेट की जल्दी पहचान कर सकेगा, जिससे खतरों को खत्म करने के लिए मिसाइलों को पहले लॉन्च किया जा सकता है।

    98L6E येनिसेई रडार से भारत को क्या फायदे होंगे?

    • स्टील्थ फाइटर जेट्स F-35, J-20, J-35A की पहले और दूर से पहचान।
    • S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की मारक क्षमता में जबरदस्त इजाफा।
    • इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग के वक्त भी मारक क्षमता पर असर नहीं।
    • मल्टी-बैंड AESA से लो-RCS टारगेट की ट्रैकिंग काफी आसान हो जाएगी।
    • लेयर्ड एयर डिफेंस से बेहतर सेंसर क्यूइंग और नेटवर्किंग क्षमता हासिल होगी।
    • चीन-पाकिस्तान के स्टील्थ खतरों के खिलाफ भारत की क्षमता मजबूत होगी।

    रणनीति के लिहाज से रूस का ये प्रस्ताव भारत के लिए काफी ज्यादा अहम हो सकता है। खासकर ऐसे वक्त में जब चीन LAC के पास J-20 स्टील्थ फाइटर जेट तैनात करने की तैयारी कर रहा है। वहीं पाकिस्तान भी भविष्य में चीनी स्टील्थ फाइटर जेट खरीद सकता है। डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, येनिसेई का एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन, भारत की लेयर्ड एयर डिफेंस को एक किले में तब्दील कर देगा। जिसमें अलग-अलग रडार बैंड, सेंसर और इंटरसेप्टर मिसाइल होंगे। ऐसे में भारतीय वायुसेना एक ऐसा नेटवर्क बना सकेगी, जो भारी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जामिंग के बावजूद ऑपरेट करता रहे।

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