डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ में आयोजित बैठक में उपस्थित लोगों की सूची के अनुसार, भारत का प्रतिनिधित्व वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक नामग्या खम्पा ने किया। वाशिंगटन में यह बैठक ट्रंप द्वारा भारत समेत 50 अन्य देशों को गाजा बोर्ड में शामिल होने के न्योते के कई दिनों के बाद हुई है। लगभग 26 देश गाजा बोर्ड ऑफ पीस के संस्थापक सदस्यों के रूप में शामिल हो चुके हैं।
चीन-रूस ने बनाई दूरी
भारत की तरह यूके, यूरोपीय यूनियन, साउथ कोरिया, जापान मेक्सिको समेत कई देश इस बैठक में ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुए हैं। जबकि रूस, चीन और यूरोप के कई देशों ने इस बोर्ड की नीतियां स्पष्ट न होने की वजह से दूरी बना ली है।
ऑब्जर्वर के तौर पर क्यों शामिल हुआ भारत?
- भारत को अमेरिकी सरकार से शांति बोर्ड का सदस्य बनने का आधिकारिक निमंत्रण मिला है लेकिन नई दिल्ली ने अभी तक बोर्ड में शामिल होने पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कि प्रस्ताव पर अभी भी विचार किया जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि नई दिल्ली प्रतिबद्धता जताने से पहले इस बोर्ड के सभी क्लॉज का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर रही है। पर्यवेक्षक के रूप में भाग लेकर भारत ने संकेत दिया है कि वह प्रस्ताव का गंभीरता से मूल्यांकन कर रहा है, लेकिन अभी संस्थागत रूप से इसमें शामिल होने के लिए तैयार नहीं है।
- भारत की विदेश नीति हमेशा से ही संतुलित रही है। नई दिल्ली के इजरायल और अरब देशों के साथ मजबूत संबंध हैं, फिलिस्तीनी मुद्दे पर भारत ने हमेशा समर्थन दिया है। बोर्ड में इजरायल, सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर जैसे देश सदस्य हैं, लेकिन फिलिस्तीन को शामिल नहीं किया गया, जिस पर कुछ सवाल उठे। पर्यवेक्षक रहकर भारत ने अमेरिका के साथ संबंध मजबूत किए बिना किसी पक्ष को पूरी तरह समर्थन दिए बिना स्थिति देखी।
- गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हुए बिना ऑब्जर्वर के तौर पर भारत का शामिल होना, यह दिखाता है कि भारत मानवीय सहायता और वैश्विक शांति के लिए प्रतिबद्ध है। पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होकर भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, साथ ही भविष्य में आगे बढ़ने का विकल्प भी खुला रखा है।
- फिलहाल भारत वैश्विक स्तर पर इस बोर्ड पर चल रही चर्चाओं पर पैनी नजर बनाए हुए है। क्योंकि गाजा बोर्ड ऑफ पीस के आलोचक इसे संयुक्त राष्ट्र का विकल्प मान रहे हैं। साथ ही इसमें फिलिस्तीन की अनुपस्थिति भी विवादास्पद है। भारत ने मास्टरस्ट्रोक चलते हुए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखी।
- बैठक में अमेरिका ने $10 बिलियन और अन्य सदस्यों ने $7 बिलियन का राहत पैकेज घोषित किया। भारत ने इन चर्चाओं में शामिल होकर शांति और मानवीय सहायता में रुचि दिखाई, लेकिन कोई फंडिंग या सैन्य प्रतिबद्धता नहीं की।
कौन से देश ने गाजा बोर्ड ऑफ पीस के मेंबर बनें?
गाजा बोर्ड ऑफ पीस में अब तक करीब 27 देश शामिल हो चुके हैं, जिसमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और UAE जैसे देश शामिल हैं। 19 फरवरी को हुई इस बोर्ड की पहली बैठक में करीब 50 देशों के राष्ट्राध्यक्ष व उनके प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि इसमें से कई देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुए।













