अग्नि-3 एक न्यूक्लियर क्षमता वाली इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 3,000 से 3,500 किलोमीटर है। इससे भारत दुश्मन देश के अंदरूनी इलाकों में रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है। रक्षा अधिकारियों ने कहा कि सफल परीक्षण ने मिसाइल सिस्टम की विश्वसनीयता और तैयारी की पुष्टि की है।
ऑपरेशनल पैरामीटर सफल रहे
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, परीक्षण के दौरान अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के सभी तकनीकी व ऑपरेशनल पैरामीटर सफल रहे। यह लॉन्च स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की निगरानी में हुआ, जो भारत की महत्वपूर्ण सैन्य ताकत का जिम्मा संभालती है। शुक्रवार को किए गए इस परीक्षण से साफ है कि भारत की स्ट्रैटेजिक डिटरेंस क्षमता पूरी तरह मजबूत और भरोसेमंद है।
अग्नि मिसाइल इंडियन डिफेंस सिस्टम का अहम हिस्सा
बता दें कि अग्नि मिसाइल सिस्टम भारतीय रक्षा प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा है। इससे पहले भारत ने ‘अग्नि-5’ बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। भारत ने बीते वर्ष अपनी अत्याधुनिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5’ का सफल परीक्षण किया था। यह परीक्षण देश की मिसाइल क्षमता में एक बड़ी कामयाबी थी।
कुछ दिन पहले ‘अग्नि-5’ का हुआ था टेस्ट
‘अग्नि-5’ बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण भी ओडिशा के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदीपुर से स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में ही सम्पन्न हुआ था। ‘अग्नि-5’ मिसाइल की मार्गदर्शन प्रणाली, प्रणोदन, चरण विभाजन (स्टेज सेपरेशन), और अंतिम सटीकता (टर्मिनल एक्युरेसी) जैसे सभी पहलुओं को परखा और प्रमाणित किया गया था। ‘अग्नि-5’ की प्रमुख विशेषताओं की बात करें तो यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से भी अधिक है। यानी यह मिसाइल इतनी दूरी तक के लक्ष्य भेदने में सक्षम है।
एयर डिफेंस और निगरानी क्षमता बढ़ाने की कवायद
- इसी बीच, भारतीय सेना ने अपनी एयर डिफेंस और निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए भी एक अहम कदम उठाया है।
- सेना ने 30 लो-लेवल लाइटवेट रडार की खरीद के लिए करीब 725 करोड़ रुपए की निविदा जारी की है।
- यह खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत की जा रही है, ताकि सिस्टम जल्दी से सेना में शामिल हो सकें।
- ये रडार खास तौर पर ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और छोटे-धीमे लक्ष्यों को पकड़ने में बेहद कारगर होंगे।













