भारत के साथ तनाव का जिक्र करते हुए अहमद ने कहा कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का सीधा अनुभव किया है। उन्होंने कहा कि पिछले साल मई में ‘भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून और पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए बिना किसी सैन्य उकसावे के हमला किया।’ पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि इंटरनेशनल कानून का सम्मान ही राज्यों के बीच व्यवहार को नियंत्रित करने वाला एकमात्र वैध मानदंड है।
कश्मीर का रोया रोना
इस दौरान पाकिस्तान कश्मीर का रोना रोने से बाज नहीं आया। इफ्तिखार अहमद ने भारत पर जम्मू कश्मीर में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के उल्लंघन का आरोप लगाया और इसे स्थायी शांति के लिए खतरा बताया। इस दौरान उन्होंने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीर विवाद को हल करने की मांग की।
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाकर अपने देश में कट्टरपंथियों को खुश करने की कोशिश करता है। जबकि असल स्थिति यह है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) इस समय सबसे ज्यादा अशांति से जूझ रहा है। पीओके में रहने वाले लोग पिछले एक साल से पाकिस्तान के नियंत्रण के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रहे हैं, जिसमें पिछले साल हुआ एक विशाल आंदोलन भी शामिल है।
सिंधु जल संधि का भी उठाया मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए अहमद ने सिंधु जल संधि पर रोक लगाने का भी मुद्दा उठाया और इसके लिए भारत की निंदा की। भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी। अहमद ने कहा कि ऐसा करके भारत ने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का एक और खुला उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पानी और अहम प्राकृतिक संसाधनों को हथियार बनाने का विरोध करता है। साथ ही यह भी कहा कि संधि का पालन करना अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की कानूनी व्यवस्था की बुनियाद है।













