दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को एक इंटरव्यू दिया है। जिसमें उन्होंने स्विट्जरलैंड पर टैरिफ बढ़ाने की पूरी कहानी सुनाई है। उन्होंने कहा है कि “एक बहुत अच्छा देश है स्विट्जरलैंड, जो कोई टैरिफ नहीं देता था। वो अपने सामान अमेरिका में बेचता था और अमेरिका के साथ उसका 42 अरब डॉलर का व्यापार घाटा था और हम उनसे कोई टैरिफ नहीं वसूल रहे थे, तो मैंने सोचा कुछ टैरिफ तो लेना चाहिए तो मैंने उनपर 30 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया।”
स्विट्जरलैंड की पीएम की बात नहीं आई पसंद
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि “30 प्रतिशत टैरिफ भी कम था, लेकिन हमने यही लगाने का फैसला किया। उसके बाद मेरे पास एक इमरजेंसी फोन आया और शायद मुझे लगता है कि वो स्विट्जरलैंड की प्रधानमंत्री का टेलीफोन था। वो बहुत एग्रेसिव थी.. वो अच्छी है, लेकिन उस रात बहुत आक्रामक थी। वो कह रही थी कि हम बहुत छोटे देश हैं, आप ऐसा नहीं करते। जिसपर मैंने कहा कि हो सकता है आप छोटे देश हों, लेकिन 42 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है।” उसपर उन्होंने कहा कि “नहीं हम बहुत छोटे देश हैं। वो फोन नहीं रख रही थी और बार बार यही बोल रही थी। और वो जिस तरह से बात कर रही थी, उसके बोलने का लहजा मुझे पसंद नहीं आ रहा था। तो मैंने टैरिफ घटाने के बजाए 9 प्रतिशत टैरिफ और बढ़ा दिया। मैंने 30 प्रतिशत से बढ़ाकर टैरिफ 39 प्रतिशत कर दिया।”
यानि सोचिए कि ट्रंप को एक प्रधानमंत्री के बात करने का अंदाज पसंद नहीं आया तो 9 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ लगा डाला। ऐसे में समझा जा सकता है कि भारत ने ट्रंप प्रशासन के साथ कैसे ट्रेड डील किया होगा। कई महीनों तक ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाए रखा और अब जाकर टैरिफ कम कर 18 प्रतिशत किया है, वो भी शर्तों के साथ। अमेरिका को अगर लगता है कि भारत रूस से ज्यादा तेल खरीद रहा है तो ट्रंप ने 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ फिर से थोपने की धमकी दे रखी है।













