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  • भारत में बनेगा सी-130जे सुपर हरक्यूलिस मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान! जानें अमेरिकन कंपनी का फ्यूचर प्लान

    नई दिल्ली: डिफेंस सेक्टर में भारत की बढ़ती ग्रोथ ने बड़ी विदेशी कंपनियों को भी भारत की तरफ रुख मोड़ने पर मजबूर कर दिया है। उसी कड़ी में अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन भारत में C-130J सुपर हरक्यूलिस सैन्य परिवहन विमानों की आखिरी असेंबली लाइन लगाने पर विचार कर रही है। यह पहली बार होगा


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    By Azad Hind Desk जनवरी 10, 2026
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    नई दिल्ली: डिफेंस सेक्टर में भारत की बढ़ती ग्रोथ ने बड़ी विदेशी कंपनियों को भी भारत की तरफ रुख मोड़ने पर मजबूर कर दिया है। उसी कड़ी में अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन भारत में C-130J सुपर हरक्यूलिस सैन्य परिवहन विमानों की आखिरी असेंबली लाइन लगाने पर विचार कर रही है। यह पहली बार होगा जब यह विमान अमेरिका के बाहर बनेगा। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह सुविधा भविष्य में इस विमान के लिए एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब भी बन सकती है।

    लॉकहीड मार्टिन के वाइस प्रेसिडेंट, स्ट्रेटेजी डेवलपमेंट, एयर मोबिलिटी एंड मैरीटाइम मिशन्स, रॉब टोथ ने बताया, ‘हम भारत में C-130J विमानों के लिए दूसरी फाइनल असेंबली लाइन स्थापित करेंगे। यह मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) प्रोग्राम के तहत भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए होगा। साथ ही, हम जॉर्जिया के मैरिएटा में अन्य ग्राहकों के लिए भी उत्पादन जारी रखेंगे।’

    उन्होंने आगे कहा, ‘हमें लगता है कि इससे भारत के एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग को और मजबूती मिलेगी। यह ग्लोबल सप्लाई चेन को भी मजबूत करेगा और किसी भी क्षेत्रीय या वैश्विक सुरक्षा संकट के समय उत्पादन बढ़ाने की क्षमता सुनिश्चित करेगा।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘आत्मनिर्भर भारत मिशन की भावना के तहत, MTA प्रोग्राम के तहत भारत के भविष्य के C-130J विमान ‘मेड इन इंडिया, फॉर इंडिया, और संभवतः फॉर द वर्ल्ड’ होंगे।’

    भारतीय वायु सेना ने दिसंबर 2022 में लगभग 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने के लिए एक रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (RFI) जारी किया था। ये विमान वायु सेना के पुराने सोवियत-युग के AN-32 और IL-76 विमानों की जगह लेंगे। इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए लॉकहीड मार्टिन का मुकाबला एयरबस के A400M और एम्ब्रेयर के C-390 से होने की उम्मीद है।

    भारत के पास कितने C-130J विमान?

    फिलहाल, भारतीय वायु सेना के पास एक दर्जन C-130J विमान हैं। इनमें से पहले 6 विमान 2011 में और बाकी 2017 में सप्लाई किए गए थे। यह विमान एक बहुत ही खास तरह का ट्रांसपोर्ट प्लेन है, जो भारी सामान और सैनिकों को कम तैयारी वाली जगहों पर भी उतार सकता है। भारत में इसका उत्पादन शुरू होने से न केवल भारतीय वायु सेना को फायदा होगा, बल्कि यह भारत को रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा निर्यातक भी बना सकता है। यह कदम मेक इन इंडिया पहल को भी बढ़ावा देगा और देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगा।

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