भारत-ब्राजील में द्विपक्षीय संधि
भारत और ब्राजील के बीच माइनिंग और मिनरल्स सेक्टर में सहयोग की द्विपक्षीय संधि क्रिटिकल मिनरल्स की होड़ में जुटी दुनिया में अहम रोल निभा सकता है। ब्राजील दुनिया में लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक है और उसके पास उन मिनरल्स का विशाल भंडार है, जो लोहा बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस तरह से यह समझौता भारत के स्टील सेक्टर के लंबे समय की स्थिरता के लिए लाभदायक है।
ब्राजील को लेकर भारत का नजरिया
इस समय जब दुनिया में ट्रेड डील पर पूरा जोर है, भारत और ब्राजील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, ‘हम द्विपक्षीय व्यापार को अगर पांच वर्षों में 20 अरब डॉलर से भी कहीं ज्यादा ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ इस समय दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 15 अरब डॉलर के आसपास है। उनके अनुसार दोनों देश टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और अन्य कई चीजों में भी मिलकर काम करेंगे।
दोनों देशों के संबंध बराबरी आधारित
वहीं ब्राजील के राष्ट्रपति लूला का कहना है कि भारत और ब्राजील की साझेदारी बराबरी आधारित है। उन्होंने कहा कि ‘सबसे ज्यादा अहम ये है कि जब हम भारत जैसे देश के साथ चर्चा करते हैं तो हम उपनिवेशवादी के साथ डील नहीं कर रहे होते। …हम दोनों देशों को एक-दूसरे की जरूरत है। कोई भी एक-दूसरे से ऊपर नहीं है।’ मतलब, लूला ने बिना कहे अमेरिका और उनके पिछलग्गू पश्चिमी देशों को सबकुछ कह दिया है, जिसमें कहीं न कहीं दूसरे पर हावी होने की कोशिश छिपी रहती है।
ट्रंप की टैरिफ नीति से प्रभावित दोनों देश
ब्राजील के राष्ट्रपति की यह भावना ऐसे समय में जाहिर हुई है, जब उनके अगले महीने अमेरिका जाने की चर्चा है, जहां उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात हो सकती है। इससे पहले उनका ये कहना कि ‘दुनिया और ज्यादा उथल-पुथल नहीं चाहती, इसे शांति चाहिए।’ यह सीधे तौर पर ब्राजील के साथ-साथ भारत का भी नजरिया है, जो पिछले आठ-नौ महीने से ट्रंप की नीतियों की वजह से असमंजस में रहा है।
टैरिफ नीति पर ट्रंप को ब्राजील का संदेश
लूला ने ट्रंप से यहां तक आग्रह किया है कि टैरिफ के मामले में किसी भी देश के साथ भेदभाव करना बंद करें। उन्होंने कहा है, ‘मैं अमेरिकी राष्ट्रपति से कहना चाहता हूं कि हम एक और नया शीत युद्ध नहीं चाहते। हम किसी दूसरे के देश में दखल नहीं चाहते,हम सभी देशों के साथ समान बर्ताव चाहते हैं।’ टैरिफ के मुद्दे पर खुद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका खाए ट्रंप के लिए यह सुझाव से ज्यादा नसीहत है, क्योंकि उनके दूसरे कार्यकाल में दुनिया ने टैरिफ को टेरर की तरह से देखना शुरू कर दिया है।













