कुल मिलाकर, 2025 में, एफपीआई ने भारतीय शेयरों से शुद्ध रूप से 1.66 लाख करोड़ रुपये (18.9 अरब डॉलर) की निकासी की है। यह एफपीआई के प्रवाह की दृष्टि से सबसे खराब वर्षों में रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इस महीने (13 फरवरी तक) शेयरों में 19,675 करोड़ रुपये का निवेश किया है।मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख प्रबंधक-शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि हाल की खरीदारी को वैश्विक वृहद चिंताओं में कमी, खासकर अमेरिका के नरम महंगाई आंकड़ों से समर्थन मिला है। इससे उनकी भारत समेत उभरते बाजार में जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है।
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सात दिन खरीदारी
इसी तरह की राय जताते हुए एंजेल वन के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकार जावेद खान ने कहा कि यह प्रवाह अमेरिका-भारत व्यापार करार, समर्थन देने वाले 2026-27 के आम बजट और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं में कमी की वजह से देखने को मिला है। एफपीआई फरवरी माह के 11 कारोबारी सत्रों में से सात में शुद्ध लिवाल रहे और चार सत्रों में बिकवाल रहे।
इसके बावजूद आंकड़ों से पता चलता है कि एफपीआई ने इस महीने शुद्ध रूप से 1,374 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। इसकी वजह यह है कि 13 फरवरी को निफ्टी में 336 अंक की गिरावट के दौरान एफपीआई ने 7,395 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस सप्ताह ‘एंथ्रोपिक झटके’ की वजह से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।













