ट्रंप के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि वॉशिंगटन अभी भी भारत की रूसी तेल खरीद पर नजर रखा है। इसका मतलब है कि ट्रंप प्रशासन का भारत के खिलाफ लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को जल्द हटाने का इरादा नहीं है। ग्रीर का यह बयान ट्रंप के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के दावोस में दिए बयान से बिल्कुल उलट है। बेसेंट ने कहा था कि रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25% टैरिफ लगाने के बाद भारतीय खरीदारी कम हो गई है।
ट्रंप प्रशासन का रूसी तेल पर यू-टर्न
बेसेंट ने तेल खरीदारी कम होने को बड़ी सफलता बताते हुए कहा था कि मुझे लगता है कि अब इन्हें हटाने का रास्ता है और यह एक अच्छी बात है। लेकिन अब ग्रीर ने इस मामले पर उलट बयान दिया है। यह साफ बता रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अहंकारी रवैये के चलते भारत के साथ एक बेकार का गतिरोध पैदा कर लिया है। हाल ही में ट्रंप की पार्टी के सीनेटर टेड क्रूज के एक ऑडियो लीक से पता चलता है कि ट्रंप खुद भारत के साथ डील में बाधा बन रहे हैं।
अमेरिका का डबल स्टैंडर्ड आया सामने
पूर्व भारतीय राजनयिक कंवल सिब्बल ने रूस से तेल खरीद पर ग्रीर के बयान को डोनाल्ड ट्रंप का डबल स्टैंडर्ड बताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ट्रंप खुद को व्यापार और निवेश की संभावनाओं को देखते हुए रूस के साथ संबंध बना रहे हैं। वे चाहते हैं कि यूक्रेन रूस को रियायते दें लेकिन रूस पर दबाव बनाए रखने के लिए भारत का इस्तेमाल करना चाहते हैं। रूस से तेल के लिए हमारे दरवाजे बंद करवाना चाहते हैं क्योंकि हम कथित तौर पर युद्ध को फाइनेंस कर रहे हैं।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के डबल स्टैंडर्ड का उदाहरण देते हुए कहा, ‘ट्रंप रूस के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन चाहते हैं कि हम (भारत) रूस से पीछे हटें।’ सिब्बल ने आगे कहा, ‘ट्रंप रूस के साथ शांति के लिए जेलेंस्की पर दबाव डाल रहे हैं, लेकिन (उल्टा) चाहते हैं कि हम जेलेंस्की की मदद के लिए रूस पर दबाव डालें।’













