क्यों खारिज कर दिया गया Gen 2 का आवेदन?
Gen 2 मंजूरी पाने के लिए कुछ जरूरी चीजों को पूरा नहीं कर रहा था, इस कारण इसके लिए किए गए आवेदन को खारिज कर दिया गया था। ET रिपोर्ट के अनुसार, IN-SPACe के चेयरमैन पवन कुमार गोयनका ने बताया है कि IN-SPACe ने स्टारलिंक के Gen 2 को मंजूरी नहीं दी है। एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि जब स्टारलिंक ने तीन से चार साल पहले आवेदन जमा किया था, तब D2D कनेक्टिविटी के बारे में ज्यादा कोई जानकारी नहीं थी और यह तकनीक हाल ही में डेवलप हुई है। अधिकारी ने कहा, “इसके Gen 2 में D2D सहित कई फीचर्स हैं और जब वे आवेदन करेंगे, तो हम उसका मूल्यांकन करेंगे।” एक अधिकारी ने बताया, “स्टारलिंक के Gen 2 में अलग-अलग फीचर्स और फ्रीक्वेंसी बैंड हैं। कुछ बैंड को तो भारत में मंजूरी भी नहीं है। उन्होंने आगे कहा, “यही कारण था कि Gen 2 को मंजूरी नहीं दी गई।”
D2D कनेक्टिविटी के लिए हो रहा विचार
भारत में फिलहाल D2D कनेक्टिविटी (यानी अंतरिक्ष से सिग्नल सीधा डिवाइस में आएंगे) की अनुमति नहीं है क्योंकि इसके लिए कोई स्ट्रेटजी और प्लानिंग नहीं है। सरकार इस तकनीक के लिए अपने अगले कदम पर फिलहाल विचार कर रहा है और दूरसंचार विभाग इस मामले पर विचार-विमर्श कर रहा है। दूरसंचार विभाग और सेक्टर रेगुलेटर को D2D सेवाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले स्पेक्ट्रम बैंड को भी अंतिम रूप देना होगा।
Gen 2 सैटेलाइट को अत्याधुनिक तकनीक के साथ किया अपग्रेड
बता दें कि Elon Muskकी कंपनी स्टारलिंक ने हाल ही में अमेरिकी नियामक FCC से 7,500 Gen 2 सैटेलाइट तैनात करने की मंजूरी हासिल की है। इससे दुनिया भर में कुल सैटेलाइट की संख्या 15,000 हो गई है। इस मंजूरी के बाद, स्पेसएक्स के स्वामित्व वाली स्टारलिंक अपने Gen 2 सैटेलाइट को एडवांस फॉर्म फैक्टर और अत्याधुनिक तकनीक के साथ अपग्रेड कर सकती है। हालांकि, अभी इस बारे में जानकारी नहीं है कि कंपनी Gen 2 के लिए फिर से कब आवेदन करेगी।













