सलाहुद्दीन अहमद ने कहा, ‘हम कानून के हिसाब से शेख हसीना के एक्सट्रैडिशन के लिए भारत पर दबाव डालेंगे। हम भारत सरकार से अपील करेंगे कि उन्हें ट्रायल का सामना करने के लिए वापस भेजा जाए। यह बांग्लादेश और भारत के विदेश मंत्रालय के बीच का मामला है। दोनों मंत्रालय इस पर आगे काम करेंगे।’
हसीना के मुद्दे पर भारत के साथ बढ़ेगा तनाव!
बीएनपी लीडर सलाहुद्दान का शेख हसीना को वापस ढाका भेजने के मुद्दे बयान अहम है क्योंकि उनकी पार्टी तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार बनाने जा रही है। शेख हसीना के मामले पर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का रुख भी इसी तरह का रहा है। यूनुस सरकार ने हालिया महीनों में कई बार इस मुद्दे पर बयान दिए थे।
यूनुस की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण को भारत से तनाव की एक वजह बना लिया था। ऐसे में बीएनपी का इस मुद्दे पर अड़ियल रुख भारत से तनाव की वजह बन सकता है। भारत ने हसीना के प्रत्यर्पण का कोई संकेत नहीं दिया है। ऐसे में बीएनपी का सख्त रुख दोनों देशों के संबंधों में तनाव की नई वजह बन सकता है।
अगस्त, 2024 से भारत में हैं शेख हसीना
बांग्लादेश में साल 2024 में जुलाई और अगस्त में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। हिंसा होने के बाद उस वक्त की पीएम शेख हसीना को आननफानन में ढाका छोड़कर भागना पड़ा था। अगस्त, 2024 के बाद से शेख हसीना ने भारत में शरण ली हुई है।
शेख हसीना पर ढाका में उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमे चलाए गए हैं और उनको मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। बांग्लादेश की यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और बीएनपी-जमात जैसे तमाम राजनीतिक दलों ने बार-बार ये कहा है कि भारत की सरकार हसीना को वापस भेज दे।












