जरदारी ने भारत को लेकर क्या कहा
इस दौरान जरदारी ने कहा, “मेरा उनके (इंडिया) लिए मैसेज है कि वे जंग के मैदान से हटकर मतलब वाली बातचीत की टेबल पर आएं, क्योंकि इलाके की सिक्योरिटी के लिए यही एकमात्र रास्ता है। इंडिया के लीडर्स का कहना है कि वे एक और जंग की तैयारी कर रहे हैं। इलाके की शांति के लाइफलॉन्ग सपोर्टर के तौर पर, मैं इसकी सलाह नहीं दूंगा।”
युद्ध को बताया आखिरी रास्ता
बतौर राष्ट्रपति जरदारी नौवीं बार नेशनल असेंबली के संयुक्त सत्र को संबोधित करने पहुंचे थे। शांति का राग अलापते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोमवार को युद्ध को आखिरी रास्ता बताते हुए भारत को आंखें दिखाने की कोशिश की। अपनी झूठी तारीफ करते हुए आगे कहा कि पाकिस्तान ने पहले ही भारत और अफगानिस्तान दोनों को अपनी काबिलियत का बस एक छोटा सा हिस्सा ही दिखाया है।
पाकिसतान के परमाणु शक्ति की गीदड़भभकी दी
इसके साथ ही जरदारी ने पाकिस्तान के परमाणु शक्ति होने का एहसास कराते हुए गीदड़भभकी की। बोले, “पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु संपन्न देश है और उस जिम्मेदारी का वजन समझता है। साथ ही, हम एक ऐसा देश हैं जो जरूरत पड़ने पर अपना बचाव करना भी जानता है।” संयुक्त बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी घरेलू या विदेशी ताकत को अपनी शांति भंग करने के लिए पड़ोसी इलाके का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दे सकते।”
जरदारी के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी
गौर करने वाली बात ये रही कि जरदारी अपनी भड़ास निकालते रहे और उधर विपक्ष उनके खिलाफ नारे लगाता रहा। ‘गो जरदारी गो’ और ‘खान को रिहा करो’ के नारे से संसद गूंजती रही। पीटीआई की अगुवाई में विपक्षी गठबंधन पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहा था। उनके बोर्ड ऑफ पीस में सहभागिता को लेकर सवाल उठाते रहे। नारे लग रहे थे ‘जाली पीस बोर्ड से बाहर निकलें।’ दरअसल, पाकिस्तान की अवाम फिलिस्तीन को लेकर इजरायल के रवैए से नाराज रहती है।













