डोनाल्ड ट्रंप जिन दो ताकतों यानी भारत और यूरोप को किनारे लगाने की कोशिश में थे, उनके बीच महत्वपूर्ण ट्रेड डील साइन होना निश्चित रूप से उन्हें चुभेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति इसे खुली चुनौती के तौर पर देखेंगे क्योंकि भारत-अमेरिका की ट्रेड डील अटकी हुई है। दूसरी ओर ईयू ने भी अमेरिका के साथ अपनी ट्रेड डील की मंजूरी रोक दी है। ईयू और भारत ने एक तरह से ट्रंप के दबाव में ना झुकते हुए चुनौती देने का काम किया है।
‘डैडी’ ट्रंप की बढ़ेगी टेंशन
पिछले साल नाटो चीफ ने डोनाल्ड ट्रंप को ‘डैडी’ उपनाम दिया था। इसके बाद ये यह ट्रंप को एक प्रभावशाली तानाशाह के रूप में पेश करने का शॉर्टहैंड बन गया है, जिसे विरोधियों और सहयोगियों दोनों को कंट्रोल करना पसंद है। भारत-ईयू ट्रेड डील ने ‘डैडी’ को परेशान कर दिया है। यह परेशानी उनके ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के बयान में साफ झलकती है, जिसमें उन्होंने यूरोप को धोखेबाज तक कह दिया है।
इंडिया-ईयू की लंबे समय से अटकी ट्रेड डील के फाइनल होने में डोनाल्ड ट्रंप के रुख को भी कुछ एक्सपर्ट अहम मान रहे हैं। अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाए, जिससे संबंधों में तनाव आया। दूसरी ओर ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की कोशिश का विरोध करने पर यूरोपीय देशों के खिलाफ भी टैरिफ का सहारा लेने की कोशिश की। इससे यूरोप में अमेरिका के खिलाफ नाराजगी बढ़ी और वह भारत के करीब आया।













