राम गोपाल वर्मा ने हमले को लेकर चिंता जताई। उन्होंने गोलीबारी की घटना से पहले क्या हुआ, इसकी जांच पर भी जोर दिया। राम गोपाल वर्मा ने ईटाइम्स से बातचीत में कहा, ‘सबसे पहले, गोलीबारी की घटना से पहले एक प्री-रन हुआ होगा, जिसके बारे में सिर्फ रोहित ही बता सकता है, है ना? ठीक है। तो क्या रोहित को फिरौती के लिए कोई फोन आया था? वह कुछ नहीं बता रहा है। तो हमें कैसे पता चलेगा कि हमले का स्रोत क्या है?’
अंडरवर्ल्ड पर बोले राम गोपाल वर्मा
बातचीत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, ‘देखिए, हमें क्या पता, ये बस किसी का मजाक हो; हमें सच में कुछ पता नहीं। किसी नामी आपराधिक संगठन का इस तरह सामने आना मुमकिन ही नहीं है। बिश्नोई की जड़ें भी दूसरे राज्य में हैं, मुंबई में नहीं।’
प्रोड्यूसर मनमोहन शेट्टी को मारने की कोशिश हुई
90 के दशक में अंडरवर्ल्ड की धमकियों और घटनाओं को याद करते हुए राम गोपाल वर्मा ने आगे कहा, ‘जब ये सब 97-98 में होता था, तो मुझे लगता है कि ये सब एक आंदोलन जैसा था। मतलब, पैमाने के हिसाब से, ये कोई अलग-थलग घटना नहीं थी। जी हां, हर कोई खतरे में था। हर वो शख्स जो कुछ भी करता था।’
अली बुदेश हत्याओं की जिम्मेदारी लेता था
राम गोपाल वर्मा ने कहा कि संगठित अपराध किसी एक घटना से अलग होता है, जो किसी भी कारण से हो सकता है, यहां तक कि किसी ने सिर्फ मजे के लिए भी ऐसा किया हो। वो बोले, ‘हां, बिश्नोई ही एकमात्र ऐसा व्यक्ति है जो बार-बार यह दावा करता है कि उसने यह किया है। उसके लिए यह गर्व की बात है, आप जानते हैं, वह एक अपराधी है। उस समय अली बुदेश नाम का एक व्यक्ति था, जो मारे गए हर व्यक्ति की जिम्मेदारी लेता था। वह यूं ही यह दावा कर लेता था।’
राम गोपाल वर्मा की फिल्में
राम गोपाल वर्मा (RGV) हिंदी और तेलुगू सिनेमा में बेहद फेमस हैं, जो मुख्य रूप से थ्रिलर, हॉरर और अंडरवर्ल्ड-बेस्ड फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी फिल्मों में ‘सत्या’ (1998), ‘कंपनी’ (2002), ‘रंगीला‘ (1995), ‘सरकार’ (2005) और ‘भूत’ (2003) शामिल हैं।













