बहरीन में जन्मी और पली-बढ़ी ममता ग्रेजुएशन करने के लिए भारत आ गईं। 21 की उम्र में ममता को टी हरिहरन की निर्देशित एक फिल्म में लीड रोल का ऑफर मिला। हरिहरन मलयालम सिनेमा के बड़े फिल्मकारों में से एक हैं, जो ‘सरपंचराम’, ‘पंचाग्नि’, ‘नखक्षथंगल’, ‘अमृतम गमया’, ‘ओरु वडक्कन वीरगाथा’, ‘परिणयम’ और ‘एनु स्वंथम जनाकीकुट्टी’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। फिल्म ‘मयूखम’ (2005) छह साल के अंतराल के बाद हरिहरन की निर्देशक के रूप में वापसी थी। हालांकि, इस बार उन्होंने नए कलाकारों को लेने का फैसला किया और लीड रोल के लिए साइजू कुरुप और ममता को चुना। फिर भी, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई। हालांकि उनके काम की सराहना की गई।
‘मयूखम’ के बाद मिलने लगे ऑफर
फिर भी, ममता को एक-एक करके ऑफर मिलने लगे और ‘मयूखम’ के तुरंत बाद उन्होंने ममूटी की फिल्म ‘बस कंडक्टर’ में एक छोटा रोल किया। इसके बाद, उन्होंने सॉफ्टकोर फिल्म ‘लंका’ (2006) में सुरेश गोपी के साथ काम करके केरल में सनसनी मचा दी, जो उनसे 27 साल बड़े थे। उसी साल, वह मोहनलाल के साथ ‘बाबा कल्याणी’ में भी नजर आईं। हालांकि, इनमें से किसी भी फिल्म से उन्हें वह पहचान नहीं मिली जिसकी उन्हें चाह थी। आखिरकार, ममूटी की ऐतिहासिक फिल्म ‘बिग बी’ (2007) ने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई। फिर भी, इसके तुरंत बाद उन्हें अभिनय के ऑफर मिलने शुरू नहीं हुए।
एक्टिंग के बाद सिंगिंग में हाथ आजमाया
इसी बीच, एक सिंगर होने के नाते, ममता ने सिंगिंग में भी हाथ आजमाया और इस क्षेत्र में उन्हें अधिक पहचान मिलने लगी। कुछ तेलुगू फिल्मों के गानों में अपनी आवाज देने के बाद, उन्हें थलपति विजय की फिल्म ‘विल्लू’ (2009) के ब्लॉकबस्टर गाने ‘डैडी मम्मी’ से जबरदस्त सफलता मिली। इसके बाद उन्होंने मलयालम, तमिल और तेलुगू में कई हिट गाने गाए।
दो बार हुआ कैंसर
ममता मोहनदास का निजी जीवन, उनकी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ काफी सुर्खियां बटोरता रहा है। कैंसर से दो बार जंग जीतकर उन्होंने आशा की किरण का परिचय दिया है। द न्यूज मिनट के अनुसार, उन्हें पहली बार 2009 में हॉजकिन लिंफोमा का पता चला था। ममता ने तुरंत इलाज कराया और डेढ़ साल बाद कैंसर मुक्त घोषित होकर वापसी की।
एक साल भी नहीं चली शादी
इसके कुछ समय बाद ही, नवंबर 2011 में उन्होंने अपने बचपन के दोस्त, बहरीन स्थित बिजनेसमैन प्रेगिथ पद्मनाभन से शादी कर ली। हालांकि, ये शादी नहीं चली और एक साल से अधिक समय बाद ही दोनों अलग हो गए। दिसंबर 2012 में ममता ने घोषणा की कि उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया है। अंत में उनका तलाक हो गया। इसी बीच, ममता के जीवन में कैंसर फिर से लौट आया। खबरों के अनुसार, उनका बोन मैरो ट्रांसप्लांट असफल रहा, जिसके कारण 2013 में कैंसर फिर से उभर आया। हालांकि, एक्ट्रेस ने हार नहीं मानी और उस समय भी बीमारी का डटकर सामना किया। इसके बाद वे अपना इलाज करवाने के लिए लॉस एंजिल्स चली गईं।
विटिलिगो नाम की हुई बीमारी
लेकिन जिंदगी ने उनके रास्ते में मुश्किलें खड़ी करना बंद नहीं किया, और 2023 में उन्हें विटिलिगो नाम की एक पुरानी ऑटोइम्यून बीमारी का पता चला, जिससे स्किन का रंग फीका पड़ने लगता है। फिर भी, यह भी ममता को रोक नहीं पाया। इंस्टाग्राम पर विटिलिगो के निदान की घोषणा करते हुए उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, ‘प्रिय सूर्य, मैं तुम्हें पहले से कहीं अधिक गले लगाती हूं। धब्बेदार होकर मेरा रंग फीका पड़ रहा है। मैं हर सुबह तुमसे पहले उठती हूं, ताकि धुंध में से तुम्हारी पहली किरण की चमक देख सकूं। मुझे अपना सब कुछ दे दो, क्योंकि मैं तुम्हारी कृपा की हमेशा ऋणी रहूंगी।’
यौन उत्पीड़न मामले में भी बोलीं
हालांकि, उनका जीवन विवादों से अछूता नहीं रहा है, क्योंकि यौन उत्पीड़न के मामलों में उनके विवादित रुख के कारण उन्हें जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा है, जहां उन्होंने पीड़ित को ही दोषी ठहराने वाली मानसिकता बनाए रखी है। इंडिया टुडे के अनुसार, उन्होंने एक दैनिक अखबार को बताया, ‘मुझे नहीं पता कि मुझे यह कहना चाहिए या नहीं, लेकिन अगर कोई महिला मुसीबत में पड़ती है, तो मुझे लगता है कि कहीं न कहीं वह इसके लिए जिम्मेदार है। क्योंकि अगर मैं किसी भी तरह की मुसीबत में फंसी होती, जहां मुझे लगता कि किसी ने मुझसे अनादर से बात की है या इस स्थिति में, यौन उत्पीड़न या यौन शोषण या इस तरह की कोई भी बात हुई है, तो मुझे लगता है कि मैं भी इसमें कुछ हद तक शामिल होती।’
ममता मोहनदास की फिल्में
ममता मोहनदास की फिल्मों की बात करें, तो उन्होंने कैंसर होने के बाद से 45 फिल्मों में काम किया। महाराजा, ओट्टा, बांद्रा, जण गन मन से लेकर थिरप्पू और लालबाग सहित कई फिल्में हैं जिनमें उनके काम की तारीफ हुई। फिलहाल वो माय डियर सिस्टर नाम की फिल्म पर काम कर रही हैं।














