क्या महंगी होगी बिजली?
सरकार का कहना है कि मसौदे का उद्देश्य देश को आर्थिक रूप से मजबूत, पर्यावरण के अनुकूल और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था प्रदान करना है। वहीं, जहां तक देश में आम आदमी की बात है तो उसके लिए तो सबसे बड़ा सवाल है कि क्या भविष्य में उसे मिलने वाली बिजली महंगी होगी। क्या अभी तक सरकार की तरफ से दी जा रही मुफ्त बिजली स्कीम पर असर पड़ेगा। मसौदे में इन सवालों का सीधा-सीधा जवाब तो नहीं है लेकिन भविष्य का अनुमान तो लगाया ही जा सकता है।
मसौदे के मुख्य बिंदुओं पर नजर डालने पर कई चीजें सामने आई हैं। सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को कम करने पर जोर दिया है। वहीं, न्यूक्लियर एनर्जी पर फोकस की बात कही है। ऐसे में निश्चित रूप से लागत बढ़ना तय है। इसके अलावा बिजली दरों यानी टैरिफ को एक उपयुक्त इंडेक्स से जोड़ने की बात कही गई है। ऐसे में हर साल टैरिफ में संशोधन हो सकेगा। मसौदे में फिक्स्ड लागत की भरपाई के लिए डिमांड चार्ज लगाने की बात कही गई है।
मसौदे में खास क्या है?
- एक बार अंतिम रूप दिए जाने के बाद यह नई नीति 2005 में बनी मौजूदा एनईपी की जगह लेगी।
- इसके तहत सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 यूनिट (किलोवाट-घंटे) और 2047 तक 4,000 यूनिट से ज्यादा करना है।
- ड्राफ्ट नीति 2026′ के मुताबिक, बिजली की जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए डिस्कॉम और एसएलडीसी राज्य स्तर पर रिसोर्स एडिक्वेसी (आरए) प्लान तैयार करेंगे। वहीं, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनाएगा।
- बिजली दरों यानी टैरिफ को एक उपयुक्त इंडेक्स से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि हर साल अपने आप उसमें संशोधन हो सके, और यह तब लागू होगा जब राज्य आयोग द्वारा कोई शुल्क आदेश पारित नहीं किया जाता है।
- मसौदे में सुझाव दिया गया है कि फिक्स्ड लागत की भरपाई धीरे-धीरे डिमांड चार्ज के जरिए की जाए, ताकि अलग-अलग उपभोक्ताओं के बीच सब्सिडी का बोझ कम हो सके।
- 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम किया जाएगा और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इसके लिए स्वच्छ और कम कार्बन वाली ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना जरूरी बताया गया है।
- ड्राफ्ट एनईपी 2026 में कहा गया है कि मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे को क्रॉस-सब्सिडी और अतिरिक्त शुल्क से छूट देने से भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।
- ड्राफ्ट नीति में विवाद निपटान व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि विवाद जल्दी सुलझें और उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम हो।
- साथ ही, ड्राफ्ट पॉलिसी पावर सेक्टर की फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए स्ट्रक्चरल बदलावों का प्रस्ताव करती है। यह एक इंडेक्स-लिंक्ड ऑटोमैटिक टैरिफ रिवीजन मैकेनिज्म का सुझाव देती है जो तब लागू होगा जब बिजली रेगुलेटर समय पर टैरिफ को रिवाइज करने में फेल हो जाएंगे, जिसका मकसद पावर कंपनियों के लिए रेवेन्यू गैप को रोकना है।
- मसौदे में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, इंडियन रेलवे और मेट्रो रेल सिस्टम के लिए क्रॉस-सब्सिडी चार्ज और सरचार्ज से छूट का भी प्रस्ताव करती है।
- यह पॉलिसी मार्केट-बेस्ड मैकेनिज्म और कैप्टिव पावर प्लांट के ज़रिए रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार को सपोर्ट करना जारी रखती है, जबकि वेरिएबल रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ने पर ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एनर्जी स्टोरेज पर अधिक जोर देती है।
- नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) को बढ़ावा देने के लिए बाजार आधारित तरीकों और कैप्टिव पावर प्लांट्स के जरिए नई क्षमता जोड़ने का सुझाव दिया गया है।
- छोटे उपभोक्ताओं के लिए स्टोरेज की सुविधा डिस्कॉम के जरिए देने की बात कही गई है, जिससे लागत कम होगी।
- उपभोक्ता डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (डीआरई) से बची हुई बिजली का व्यापार कर सकेंगे और 2030 तक रिन्यूएबल और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को बराबरी का दर्जा दिया जाएगा।
- शांति अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अनुसार, इसमें एडवांस न्यूक्लियर तकनीक, मॉड्यूलर रिएक्टर, छोटे परमाणु रिएक्टर और उद्योगों द्वारा परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की भी सिफारिश की गई है।













