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  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कैसे हटाया जा सकता है, मौजूदा संख्या बल में पूरी होगी दीदी की इच्छा?

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से चलाई जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद वकीलों की तरह बहस भी की और सोमवार को भी


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    By Azad Hind Desk फरवरी 5, 2026
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    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से चलाई जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद वकीलों की तरह बहस भी की और सोमवार को भी ऐसा ही करने की तैयारी में हैं। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष सीईसी से इसको लेकर इतनी नाराज हैं कि वह उन्हें उनके पद से हटाने की मुहिम में भी जुटी हुई हैं।

    सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाना चाहती हैं ममता

    ममता बनर्जी ने मंगलवार को खुद माना कि वह जानती हैं कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाना संसद की संख्या गणित के हिसाब से विपक्ष के हाथ में नहीं है। लेकिन, फिर भी वह इसके माध्यम से एक राजनीतिक संदेश देना चाहती हैं। ऐसे में यह जानना जरूर है कि सीईसी को उनके पद से हटाने की क्या प्रक्रिया है और दीदी के लिए अभी यह क्यों नामुमकिन है?

    सीईसी के खिलाफ ‘महाभियोग’ लाने पर विचार

    पश्चिम बंगाल में एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सीईसी और अन्य चुनाव आयुक्तों पर कार्रवाई के लिए रेट्रोस्पेक्टिव कानून लाने वाली टिप्पणी पर पूछे गए सवाल पर कहा, ‘अगर यह जनता के हित में है…हम चाहते हैं कि उनपर महाभियोग चलाया जाए। हालांकि उनके पास संख्या बल नहीं है,लेकिन यह रिकॉर्ड में आ जाएगा। अगर वे ऐसा कुछ लाते हैं तो मैं इसके समर्थन में हूं।’

    मुख्य चुनाव आयुक्त को कैसे हटाया जा सकता है

    भारत के संविधान के आर्टिकल 324(5) में सीईसी को उनके पद से हटाने की व्यवस्था है। संविधान का यह आर्टिकल कहता है, ‘…मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह और उन्हीं आधारों के अलावा नहीं हटाया जाएगा।’

    सुप्रीम कोर्ट के जज को कैसे हटाया जा सकता है

    सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों, सीईसी, कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) को ‘साबित दुर्व्यवहार या अक्षमता’ के आधार पर संसद से प्रस्ताव पारित करवा कर उनके पदों से हटाया जा सकता है। संविधान में सुप्रीम कोर्ट के जज को उनके पद से हटाने का प्रावधान आर्टिकल 124(4) में उपलब्ध है।

    सीईसी को हटाने के लिए कितने सांसदों की जरूरत

    संविधान के आर्टिकल 124(4) में सुप्रीम कोर्ट के जज को उनके पद से हटाने के लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है, जो कि सदन की कुल सदस्य संख्या के 50% से अधिक हो। हालांकि, इन सबको हटाने के लिए महाभियोग (impeachment) शब्द का इस्तेमाल नहीं होता, जो कि सिर्फ राष्ट्रपति तक को हटाने तक ही सीमित है। क्योंकि, महाभियोग पारित कराने के लिए दोनों सदनों के कुल सदस्यों के 2/3 वाले विशेष बहुमत की व्यवस्था है।

    मौजूदा संख्या बल में नहीं पूरी होगी दीदी की इच्छा

    ऐसे में ममता बनर्जी ही नहीं, उनकी सहयोगी कांग्रेस और पूरे इंडी गठबंधन का सीईसी ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का मंसूबा नाकाम साबित हो सकता है। क्योंकि, संसद में सांसदों की संख्या गणित को देखें तो 543 सदस्यों वाले लोकसभा में सत्ताधारी एनडीए के पास अभी 293 एमपी हैं और 245 सदस्यों वाले राज्यसभा में सत्ताधारी गठबंधन को 134 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। इनके अलावा कुछ न्यूट्रल दल भी हैं, जो हर आवश्यक अवसर पर सरकार को समर्थन देते आए हैं।

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