दूसरी बार इजरायल जा रहे मोदी
पीएम मोदी की इजरायल यात्रा से पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कम से कम दो बार भारत आने की तारीख का ऐलान किया था। हालांकि, उनकी यात्रा अलग-अलग कारणों से मुकम्मल न हो सकी। यह प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी इजरायल यात्रा होगी। इससे पहले वे जुलाई 2017 में इजरायल का दौरा कर चुके हैं। पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत की इजरायल के साथ नजदीकियां काफी बढ़ी हैं। बड़ी संख्या में इजरायल के शीर्ष नेता और अधिकारी भारत आ रहे हैं। भारतीय अधिकारी भी इजरायल का दौरा करते हैं। ऐसे में जानें कि पीएम मोदी का इजरायल दौरा क्यों महत्वपूर्ण है और इस पर दुनिया की नजर क्यों रहेगी।
1- मध्य पूर्व संघर्ष
पीएम मोदी का इजरायल दौरा तब हो रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। गाजा युद्ध भले ही खत्म हो गया है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच छिटपुट झड़पें अभी जारी है। वहीं, इजरायल गाजा पट्टी में यहूदी कॉलोनियों का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच भी तनाव चरम पर है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका कभी भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इसमें इजरायल के भी शामिल होने का अंदेशा है, जो अमेरिका का साथ देगा और ईरान की मुश्किलें बढ़ाएगा। अगर मध्य पूर्व में संघर्ष छिड़ता है तो इससे उस इलाके में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीय लोग भी प्रभावित हो सकते हैं।
2- हेक्सागन अलायंस
हाल में ही नेतन्याहू ने ऐलान किया है कि वह भारत को साथ लेकर हेक्सागन अलायंस बनाने जा रहे हैं, जिसमें अरब, अफ्रीकी और एशियाई देश भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य कट्टरवाद के खिलाफ भारत, ग्रीस, साइप्रस और चुनिंदा अरब एवं भूमध्यसागरीय देशों का एक गठबंधन बनाना है। नेतन्याहू ने इसे दुनिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि इसकी डिटेल बाद में सार्वजनिक की जाएगी। माना जा रहा है कि यह गठबंधन इस्लामिक कट्टरवाद का मुकाबला करेगा।
3- इजरायल की घरेलू राजनीति
इजरायल में इन दिनों सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खींचतान मची हुई है। इजरायल के विपक्षी दलों ने संसद में पीएम मोदी के संबोधन का बहिष्कार करने की धमकी दी है। उनकी मांग है कि पीएम मोदी के संसद में भाषण के दौरान परंपरा के अनुसार इजरायल के चीफ जस्टिस को बुलाया जाए। हालांकि, नेतन्याहू सरकार ने चीफ जस्टिस की नियुक्ति को ही अवैध बताया है और उनका विरोध किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसका असर पीएम मोदी के इजरायल दौरे पर पड़ सकता है।
4- इजरायल पर युद्ध अपराध का आरोप
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने गाजा युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया है। उसने नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है। हालांकि भारत अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय का सदस्य नहीं है। ऐसे में कुछ आलोचकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नेतन्याहू को गले लगाने से बचना चाहिए। यह कुछ ऐसा ही है, जब पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गले लगाया था। हालांकि, भारत इन दोनों देशों के साथ संबंधों को द्विपक्षीय नजरिए से देखता है।
5- ट्रंप की इजरायल नीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल को लेकर काफी स्पष्ट हैं। उनकी सरकार इजरायल का खुला समर्थन कर रही है। एक दिन पहले ही इजरायल में अमेरिकी राजदूत ने कहा था कि उनका देश इजरायल के मध्य पूर्व में विस्तार का समर्थक है, जिस पर भारी बवाल हुआ था। ट्रंप प्रशासन ने इजरायल के समर्थन में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए। एक बार फिर ट्रंप इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमले की तैयारी में हैं। इसके अलावा वे गाजा पर इजरायल के हमले का समर्थन करते हैं और उसके पुनर्निर्माण में इजरायल की महत्वपूर्ण भूमिका को मानते हैं।
6- रक्षा और सैन्य तकनीक
इजरायल दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है, जो अडवांस हथियारों और मिलिट्री तकनीकों से लैस है। इजरायल भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर भी है। ऐसी संभावना है कि पीएम मोदी के इजरायल दौरे पर दोनों देशों के बीच कई बड़े रक्षा समझौते हो सकते हैं। इनमें कई घातक मिसाइलें और उन्हें बनाने की तकनीक का ट्रांसफर शामिल है। इसके अलावा भारत और इजरायल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग पर भी एक साथ काम करने को तैयार हैं।
7- आईएमईसी कॉरिडोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे पर आईएमईसी कॉरिडोर पर भी चर्चा करेंगे। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के लिए भारत का प्रयास उसकी कनेक्टिविटी संबंधी महत्वाकांक्षाओं का एक प्रमुख घटक बना हुआ है। भारत इस गलियारे के जरिए खाड़ी देशों के रास्ते यूरोप से जुड़ना चाहता है, जिससे न सिर्फ माल ढुलाई की लागत में कमी आएगी, बल्कि समय में भी कटौती होगी। यह कॉरिडोर लंबे समय से क्षेत्रीय संघर्ष और तनाव के कारण लंबित पड़ा है।













