इजरायली विपक्ष पीएम मोदी के भाषण की बहिष्कार की धमकी क्यों दे रहा
इजरायल का विपक्ष पीएम मोदी के संबोधन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट जस्टिस यित्जाक एमित को संसद में बुलाने की मांग कर रहा है। इजरायल में यह पुरानी परंपरा रही है कि विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के संसद में संबोधन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को बुलाया जाता है। हालांकि, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार जस्टिस यित्जाक एमित को बुलाने को तैयार नहीं है। सरकार ने उनके चीफ जस्टिस बनने की योग्यता पर सवाल उठाया है।
विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने क्या कहा
ऐसे में विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने पिछले हफ्ते कहा था कि अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को इस इवेंट से बाहर रखती है, तो विपक्षी सांसद शामिल नहीं होंगे। लैपिड ने कहा, “अगर गठबंधन भारत के प्रधानमंत्री के साथ स्पेशल सेशन में सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट का बायकॉट करता है, तो हम शामिल नहीं हो पाएंगे,” उन्होंने नेसेट को होने वाली शर्मिंदगी की चेतावनी दी और ओहाना पर इजरायल की इंटरनेशनल इमेज को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से स्पीकर ओहाना को जस्टिस एमित को इनविटेशन देने का निर्देश देने को कहा।
इजरायली संसद के स्पीकर ने बनाई योजना
इस बीच इजरायली संसद के स्पीर ओहाना ने आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि अगर लैपिड “एक जरूरी दोस्त और दुनिया की बड़ी ताकतों में से एक” के साथ इजरायल के विदेशी रिश्तों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, तो यह उनका फैसला है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों ने अर्जेंटीना के प्रेसिडेंट जेवियर माइली, अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप या भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले दौरों के दौरान सम्मान में दिए गए पिछले स्पेशल सेशन का बॉयकॉट नहीं किया था, भले ही सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट को उन इवेंट्स में नहीं बुलाया गया था।













