क्या है D2M तकनीक
D2M तकनीक को अगर आम भाषा में समझना हो तो इसका मुख्य उद्देश्य किसी मोबाइल फोन में लाइव टीवी चैनल दिखाना है। यह काम बिना इंटरनेट के होगा। फोन में टीवी चैनल दिखाने के लिए टेलिकॉम कंपनियों जैसे- जियो-एयरटेल के टावरों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। कहा जाता है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को होगा। उन्हें बिना मोबाइल नेटवर्क के भी सभी जानकारियां दी जा सकेंगी। आपत स्थिति में अलर्ट जारी हो पाएगा।
कहां तक पहुंची यह तकनीक
प्रसार भारती ने IIT कानपुर के साथ एक समझौता किया था। 2019 में हुए समझौते के तहत यह चेक किया जाना था कि D2M तकनीक की वजह से मोबाइल सेवाओं में तो कोई दिक्कत नहीं आएगी? साथ ही यह भी देखा जाना था कि लाइव टीवी चैनलों को ट्रांसमीट करने से मोबाइल फोन गर्म तो नहीं हो जाएंगे।
हो गई टेस्टिंग, आ गई रिपोर्ट
न्यूइंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रसार भारती ने इस तकनीक की टेस्टिंग की है। आईआईटी कानपुर ने टेलिकॉम इंजीनियरिंग सेंटर और एराकॉन टेक्नोलॉजी नाम के पार्टनर के साथ तकनीक को टेस्ट किया। कहा जाता है कि टेस्टिंग के दौरान D2M तकनीक को सपोर्ट करने वाले मोबाइल को यूज किया गया। इसकी रिपोर्ट पिछले साल नवंबर में आई है, जिसमें किसी तरह की चिंता की जरूरत को गलत बताया गया है यानी D2M तकनीक की वजह से मोबाइल सिग्नलों पर असर ना होने की बात है।
COAI ने क्या कहा?
COAI का कहना है कि D2M ब्रॉडकास्टिंग को लेकर जो तकनीकी टेस्ट किए गए हैं, वो चिंता बढ़ाने वाले हैं। यह प्रक्रिया सबको साथ लेकर चलने वाली नहीं थी। COAI का कहना है कि इसमें टेलिकॉम कंपनियों को शामिल नहीं करने से भविष्य में दिक्कतें आ सकती हैं। सिग्नलों में प्रॉब्लम देखने को मिल सकती है। COAI का यह भी कहना है कि टेस्ट रिपोर्ट से इसलिए हैरानी हुई है, क्योंकि इसमें टेलिकॉम कंपनियों को शामिल ही नहीं किया गया।














