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  • म्यांमार में चुनाव या मजाक? पहले चरण में सैन्य जुंटा समर्थित पार्टी ने 96 में से 87 सीटें जीतीं

    नेपीडा: म्यांमार की सत्ता पर काबिज सैन्य शासन, जुंटा की समर्थक पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। जुंटा की देखरेख में हुए चुनावों के पहले चरण में उसके समर्थन वाली USDP ने अब तक घोषित निचली सदन की 90 फीसदी सीटें जीत ली हैं। सेना ने साल 2021 में तख्तापलट करके देश की सत्ता


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    By Azad Hind Desk जनवरी 4, 2026
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    नेपीडा: म्यांमार की सत्ता पर काबिज सैन्य शासन, जुंटा की समर्थक पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। जुंटा की देखरेख में हुए चुनावों के पहले चरण में उसके समर्थन वाली USDP ने अब तक घोषित निचली सदन की 90 फीसदी सीटें जीत ली हैं। सेना ने साल 2021 में तख्तापलट करके देश की सत्ता हथिया ली थी। इसके बाद से देश गृह युद्ध में घिरा है। देशभर के विद्रोही गुट जुंटा बलों के खिलाफ लड़ रहे हैं। इस बीच जुंटा ने म्यांमार में ये चुनाव कराए हैं।

    म्यांमार में एक हफ्ते पहले चरणबद्ध महीने भर चलने वाले चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हुई है। जुंटा ने इसे देश में लोकतंत्र बहाल करने का रास्ता बताया है। दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पश्चिमी राजनयिकों ने इसे एक दिखावा और मार्शल लॉ का नया रूप बताया है। चुनाव में विपक्षियों पर काफी सख्त रुख दिखाया गया है।

    सरकार समर्थित पार्टी का दबदबा

    म्यांमार के सरकारी मीडिया में शनिवार और रविवार को जारी यूनियन इलेक्शन कमीशन (UEC) के नतीजों के अनुसार, सेना समर्थक यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP) ने 96 निचली सदन सीटों में से 87 सीटें जीत ली हैं। छह जातीय अल्पसंख्यक पार्टियों ने नौ सीटें जीती हैं। USDP ने पहले चरण में घोषित 15 क्षेत्रीय और राज्य निर्वाचन क्षेत्र सीटों में से 14 सीटें भी जीतीं।

    वोटिंग के पहले चरण में छह और टाउनशिप के विजेताओं की घोषणा अभी बाकी है। दो और चरण 11 और 25 जनवरी को होने हैं। भंग हो चुकी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) की लोकतांत्रिक नेता आंग सान सू की का नाम मतपत्रों पर नहीं था। वह तख्तापलट के बाद से जेल में हैं। इस चुनाव में पहले चरण में 50% लोगों ने वोट डाला, जो 2020 की 70% भागीदारी से काफी कम है

    सेना ने 2020 के पिछले चुनाव के नतीजों को पलट दिया था, जब NLD ने USDP को भारी बहुमत से हराया था। इसके बाद सेना और USDP ने बड़े पैमाने पर मतदाता धोखाधड़ी का आरोप लगाया और सेना ने तख्तापलट करते हुए सत्ता हथिया ली थी। इसके बाद से देश में बड़े पैमाने पर उथल पुथल मची है।

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