सेबी ने साफ कर दिया है कि म्यूचुअल फंड स्कीम के सभी खर्चे स्कीम से ही दिए जाने चाहिए और उनकी एक तय सीमा होगी। अगर फंड चलाने का खर्च सेबी द्वारा तय की गई सीमा से ज्यादा होता है, तो वह एक्स्ट्रा पैसा निवेशकों की जेब से नहीं, बल्कि असेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) को अपनी जेब से देना होगा। इससे निवेशकों का पैसा बचेगा।
Mutual Fund: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को होगा फायदा, आईपीओ के नियम होंगे आसान, सेबी की बैठक में लग सकती है मुहर
ब्रोकरेज चार्ज को भी घटाया
शेयरों की खरीद-फरोख्त पर लगने वाले ब्रोकरेज चार्ज को भी सेबी ने घटा दिया है। कैश मार्केट के लिए इसे 0.12% से घटाकर 0.06% और डेरिवेटिव्स के लिए 0.05% से घटाकर 0.02% कर दिया गया है। साल 2018 में शुरू किया गया 0.05% का अतिरिक्त एग्जिट लोड भी अब खत्म कर दिया गया है।
बार-बार डॉक्यूमेंट नहीं
सेबी ने शुक्रवार को एक प्रस्ताव पेश किया, जिसका मकसद ग्राहकों के लिए खाता खोलने की प्रक्रिया को सरल बनाना और केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों (KRAS) के रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करना है। सेबी का प्रस्ताव है कि ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त जानकारियों को अब KRA के पास एक ही जगह सेंट्रलाइज किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि निवेशकों को अलग-अलग ब्रोकरों या संस्थानों के पास जाने पर बार-बार वही जानकारी नहीं देनी पड़ेगी।
वहीं सेबी ने बार-बार होने वाली वेरिफिकेशन को भी कम करने का सुझाव दिया है। आधार से लिंक मोबाइल नंबर और अपडेटेड पैन-आधार होने पर अलग से वेरिफिकेशन या सबूत की जरूरत नहीं होगी। वहीं, भारत में 182 दिनों से ज्यादा समय से रहने वाले OCI कार्ड धारकों के लिए विदेशी एड्रेस देना जरूरी नहीं होगा।
FPIs के लिए नियम आसान
विदेशी निवेशकों (FPIs) को लुभाने के लिए सेबी ने ‘SWAGAT-FI’ सिस्टम के तहत नियमों को बेहद आसान कर दिया है। अब विदेशी निवेशकों को अलग-अलग श्रेणियों में रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग फॉर्म नहीं भरने होंगे। रजिस्ट्रेशन और केवाईसी की वैधता को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है। यह बदलाव जून 2026 से लागू होगा।













