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  • यूएस से तनातनी के बीच ईरान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा, चाबहार पोर्ट क्यों रहेगा मुख्य एजेंडा, अमेरिका से है कनेक्शन

    नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। इस बीच यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी जगह अटैक करेंगे जहां दर्द सबसे ज्यादा होगा। ईरान के खिलाफ अमेरिका के सख्त रूख पर दुनिया की निगाहें हैं। वहीं इस घमासान के बीच ईरानी विदेश


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    By Azad Hind Desk जनवरी 10, 2026
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    नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। इस बीच यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी जगह अटैक करेंगे जहां दर्द सबसे ज्यादा होगा। ईरान के खिलाफ अमेरिका के सख्त रूख पर दुनिया की निगाहें हैं। वहीं इस घमासान के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते भारत आ रहे हैं। उनकी यात्रा का मुख्य एजेंडा चाबहार बंदरगाह होगा। मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के 15-16 जनवरी को भारत के प्रस्तावित दौरे के दौरान चाबहार बंदरगाह का मुद्दा एजेंडे में प्रमुखता से शामिल रहेगा, क्योंकि बंदरगाह के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली छूट अप्रैल में खत्म होने वाली है।

    अगले हफ्ते भारत आ रहे ईरान के विदेश मंत्री

    रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले चाबहार पोर्ट का प्रबंधन इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड 2024 से 10 साल की अवधि के लिए कर रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिलने के अलावा, ईरानी विदेश मंत्री अराघची राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से भी मिलने की योजना बना रहे हैं।

    चाबहार पोर्ट होगा अहम एजेंडा

    चाबहार बंदरगाह न केवल अफगानिस्तान के लिए, बल्कि मध्य एशियाई देशों के लिए भी अहम रास्ता है। ये हिंद महासागर तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इससे वे भारतीय और खाड़ी देशों के बाजारों तक आसानी पहुंच सकते हैं। यह बंदरगाह रूस के उन हिस्सों को भी जोड़ता है जो मध्य एशिया से सटे हुए हैं। ये बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करता है।

    अप्रैल में खत्म होने वाली है अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट

    अक्टूबर 2025 में, भारत ने इस बंदरगाह के लिए अमेरिका से छह महीने की प्रतिबंधों में छूट हासिल की थी। इससे पहले, 13 मई, 2024 को, भारत ने बंदरगाह संचालन के लिए 10 साल का अनुबंध किया था, यह पहली बार था जब उसने किसी विदेशी बंदरगाह का प्रबंधन संभाला था। यह दीर्घकालिक समझौता इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और ईरान के पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के बीच हुआ था।

    क्यों खास है चाबहार पोर्ट

    चाबहार पोर्ट भारत-अफगानिस्तान आर्थिक साझेदारी के विस्तार और मानवीय सहायता की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें एम्बुलेंस भी शामिल हैं जो भारत ने पिछले अक्टूबर में अफगान विदेश मंत्री के भारत दौरे के दौरान उपहार में दी थीं। अफगानिस्तान का तालिबान शासन भी अपनी वैश्विक पहुंच के लिए बंदरगाह के प्रभावी इस्तेमाल को लेकर उत्सुक है। पोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है।

    कई देशों के लिए महत्वपूर्ण

    उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और ताजिकिस्तान भी भारत के साथ व्यापार बढ़ाने और हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंच के लिए चाबहार बंदरगाह का उपयोग करने के इच्छुक हैं। भारत यूरेशिया के बाजारों तक पहुंचने और यूरेशिया से रेयर अर्थ खनिजों सहित सामान प्राप्त करने के लिए यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ एक प्रारंभिक फसल मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने की कोशिश कर रहा है।

    भारत-ईरान राजनयिक संबंधों के 75 साल

    अराघची की यात्रा के दौरान भारत और ईरान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने का भी जश्न मनाने की भी प्लानिंग है। ईरानी विदेश मंत्री को ऐतिहासिक द्विपक्षीय दस्तावेजों की एक प्रदर्शनी देखने और वहां के कारोबारी समुदाय और एक प्रमुख थिंक टैंक के साथ बातचीत करने की उम्मीद है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का एक मौका है। चाबहार बंदरगाह का भविष्य इस मुलाकात के बाद और स्पष्ट हो सकता है।

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