इस योजना के तहत आपके ईपीएफ खाते का कुछ हिस्सा फ्रीज कर दिया जाएगा, लेकिन एक बड़ी रकम आप यूपीआई पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल करके अपने बैंक खाते में मंगवा सकेंगे। इसके बाद उस पैसे का किसी भी तरह इस्तेमाल कर सकेंगे। ईपीएफओ इस नए सिस्टम को लागू करने के लिए सॉफ्टवेयर की दिक्कतों को दूर करने में लगा है। इस सुविधा से करीब आठ करोड़ ईपीएफओ मेंबर्स को फायदा होगा।
म्यूचुअल फंड के निवेशकों को होगी बचत, SEBI लाया BER फॉर्मूला, जानें कैसे होगा फायदा
कैसे कर सकेंगे अकाउंट में ट्रांसफर?
जो ईपीएफओ मेंबर इस सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं, वे अपने ईपीएफ खाते में उपलब्ध उस पैसे को देख पाएंगे जिसे निकाला जा सकता है। फिर, वे अपने लिंक किए गए यूपीआई पिन का इस्तेमाल करके इस पैसे को अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। यह तरीका बहुत सुरक्षित होगा। एक बार जब पैसा आपके बैंक अकाउंट में आ जाएगा, तो आप उसे अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर पाएंगे। आप इससे ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं या फिर अपने डेबिट कार्ड से एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं।
अभी पैसा निकालने की क्या है सुविधा?
फिलहाल, ईपीएफओ सदस्यों को अपना ईपीएफ का पैसा निकालने के लिए क्लेम अप्लाई करना पड़ता है। इसमें काफी समय लग जाता है। ईपीएफओ में ऑटो-सेटलमेंट का एक तरीका पहले से मौजूद है। इसमें क्लेम अप्लाई करने के तीन दिन के अंदर पैसा इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सेटल हो जाता है, जिसमें किसी भी तरह की मैनुअल दखलअंदाजी नहीं होती।
इस ऑटो-सेटलमेंट मोड की लिमिट को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है। इससे बड़ी संख्या में ईपीएफओ सदस्य बीमारी, पढ़ाई, शादी और घर बनाने जैसे कामों के लिए तीन दिन के अंदर अपना ईपीएफ का पैसा निकाल सकेंगे।
नए सिस्टम का मकसद
इस नए सिस्टम को इसलिए विकसित किया जा रहा है ताकि इस समय लेने वाली प्रक्रिया से बचा जा सके और ईपीएफओ पर काम का बोझ कम हो। हर साल ईपीएफओ में 5 करोड़ से ज्यादा क्लेम सेटल होते हैं, जिनमें से ज्यादातर ईपीएफ निकालने के लिए होते हैं।
एक बड़े अधिकारी ने बताया कि ईपीएफओ सीधे ईपीएफ खातों से पैसे निकालने की अनुमति नहीं दे सकता, क्योंकि ईपीएफओ के पास कोई बैंकिंग लाइसेंस नहीं है। लेकिन अधिकारी ने यह भी कहा कि सरकार ईपीएफओ की सेवाओं को बेहतर बनाकर बैंकों के स्तर पर लाना चाहती है।
(पीटीआई इनपुट के साथ)













