रॉयटर्स के साथ इंटरव्यू में ओर्पो ने कहा, ‘आज की दुनिया में ट्रेड एग्रीमेंट की वैल्यू बहुत ज्यादा है। हमें दुनियाभर में टैरिफ लगाने की नहीं बल्कि ज्यादा से ज्यादा फ्री ट्रेड की जरूरत है। हम कह सकते हैं कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड डील महत्वपूर्ण है और इसी तरफ दुनिया को कदम बढ़ाने चाहिए।’
भारत के दौरे पर आए हैं ओर्पो
पेटेरी ओर्पो और नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद भारतीय प्रधानमंत्री ऑफिस ने कहा है कि दोनों नेताओं ने ईयू-इंडिया डील का स्वागत किया है। बयान में कहा गया है कि यह डील साझा तरक्की और खुशहाली के लिए एक कैटलिस्ट का काम करेगी। इस डील से भविष्य में अच्छे नतीजे मिलने की उम्मीद जताई गई है।
यूरोप के देश फिनलैंड के पीएम एआई समिट के लिए भारत दौरे पर हैं। ओर्पो ने कहा है कि फिनलैंड 2030 के दशक की शुरुआत तक भारत के साथ अपने ट्रेड को दोगुना करने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि फिनलैंड और भारत ग्लोबल पार्टनर्स के साथ मिलकर दुनिया में एक अहम रोल निभा सकते हैं।
क्या है भारत-ईयू डील
यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी में व्यापार समझौते का ऐलान किया है। बड़े समझौतों की वजह से इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा गया है। इस डील का असर भारत और यूरोप की बड़ी आबादी पर होगा।
भारत और यूरोपीय यूनियन के बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर 27 जनवरी को नई दिल्ली में दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए। करीब 20 साल की लंबी बातचीत और कई उतार-चढ़ाव के बाद यह समझौता हुआ है। इससे तकरीबन 200 करोड़ लोगों का एकीकृत बाजार बनेगा। यानी इससे बड़ी आबादी प्रभावित होगी।













