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  • यूरोप से ट्रेड डील करे पाकिस्‍तान, नहीं तो आएगी तबाही, भारत के मदर ऑफ ऑल डील पर पाकिस्‍तानी एक्‍सपर्ट ने चेताया

    इस्‍लामाबाद: अमेरिका में राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के सत्‍ता में आने के बाद से ही दुनियाभर में टैरिफ वार शुरू हो गया है। डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत से लेकर यूरोप तक पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। भारत तो 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ झेल रहा है। इस बीच ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ भारत ने


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    By Azad Hind Desk फरवरी 2, 2026
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    इस्‍लामाबाद: अमेरिका में राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के सत्‍ता में आने के बाद से ही दुनियाभर में टैरिफ वार शुरू हो गया है। डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत से लेकर यूरोप तक पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। भारत तो 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ झेल रहा है। इस बीच ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ भारत ने यूरोप के साथ मदर ऑफ ऑल फ्री ट्रेड डील करके दुनिया को बड़ा संदेश दिया है। इस डील से न केवल अमेरिका बल्कि भारत के दो धुर विरोधी पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश भी सहमे हुए हैं। बांग्‍लादेश के मुखिया मोहम्‍मद यूनुस यूरोप से ट्रेड डील करने में जुट गए हैं। वहीं पाकिस्‍तान में 1 करोड़ लोगों के बेरोजगार होने का खतरा पैदा हो गया है। इस महासंकट से निपटने के पाकिस्‍तानी एक्‍सपर्ट ने शहबाज सरकार को तत्‍काल यूरोपीय संघ के साथ व्‍यापक ट्रेड डील करने की नसीहत दी है।

    पाकिस्‍तान के इंटरनैशनल ट्रेड एक्‍सपर्ट शमसुल इस्‍लाम खान ने पाकिस्‍तानी एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून में लिखे अपने लेख में कहा कि भारत और यूरोप की ट्रेड डील यह दिखाती है कि वैश्विक व्‍यापार खत्‍म नहीं हो रहा है, बल्कि उसका तरीका बदल रहा है। दुनिया के देश अब भी विशाल बाजारों की तलाश कर रहे हैं जहां पर नियम हों और भरोसेमंद सहयोगी हों। भारत और यूरोप की बातचीत इस अनिश्चित वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में स्थिरता की तलाश है। इस्‍लाम खान ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच पिछले करीब 2 दशक से बातचीत चल रही थी।

    पाकिस्‍तान पर भारत यूरोप डील का क्‍या होगा असर?

    इस्‍लाम खान ने कहा कि भारत और यूरोप ट्रेड डील से वैश्विक व्‍यापार का माहौल बदल जाएगा। उन्‍होंने कहा कि अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ से भारत का टेक्‍सटाइल और कपड़े का बाजार बहुत ज्‍यादा प्रभावित हुआ है। इसकी वजह से आर्डर प्रभावित हुए हैं और खरीददार अन्‍य विकल्‍पों की तलाश कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत और यूरोप के बीच सामानों का व्‍यापार करीब 136 अरब डॉलर है। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है जहां भारत का 17 फीसदी सामान एक्‍सपोर्ट किया जाता है।

    पाकिस्‍तानी एक्‍सपर्ट ने कहा कि ये घटनाक्रम पाकिस्‍तान के लिए कई सवाल खड़े कर रहे हैं। यूरोपीय संघ पाकिस्‍तान का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। यूरोप में पाकिस्‍तान का 27 फीसदी निर्यात किया जाता है जो करीब 8.8 अरब डॉलर का है। पाकिस्‍तान यूरोप को ज्‍यादातर गार्मेंट, शर्ट, जींस, तौलिए और बेड शीट का निर्यात करता है। उन्‍होंने कहा कि अगर यूरोपीय संघ भारत को भी एफटीए के तहत ऐसी ही छूट देता है तो पाकिस्‍तानी निर्यातकों का मार्जिन बहुत कम हो जाएगा। यही नहीं भारत और यूरोप के डील से बासमती चावल का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि एफटीए करने में भी पाकिस्‍तान भारत से पिछड़ गया है। भारत ने ब्रिटेन के साथ एफटीए किया है। यूएई और इजरायल के साथ बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। वहीं पाकिस्‍तान बड़ी अर्थव्‍यवस्‍थाओं के साथ एफटीए करने में फेल साबित हुआ है।

    डोनाल्‍ड ट्रंप को खुश करने में लगा था पाकिस्‍तान

    बता दें कि भारत पर 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लगने के बाद शहबाज सरकार काफी खुश हुई थी। उसे उम्‍मीद थी कि अब अमेरिकी बाजार पर पाकिस्‍तानी कब्‍जा होगा। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ वार के दौरान शहबाज सरकार ने इसे हवा दी। डोनाल्‍ड ट्रंप की खुशामद करने के लिए शहबाज शरीफ ने उन्‍हें नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग कर डाली थी। अब भारत के मास्‍टर स्‍ट्रोक से पाकिस्‍तान में 1 करोड़ नौकरियों के जाने का खतरा पैदा हो गया है। इस ट्रेड डील से पाकिस्‍तान में हड़कंप का माहौल है।

    पाकिस्‍तान की पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी डॉन में लिखे लेख में कहती हैं कि भारत यूरोपीय संघ ट्रेड डील हो या कनाडा और चीन के बीच समझौता, यह दिखाता है कि दुनिया अब व्‍यापार को बदल रही है। ब्रिटेन के पीएम कीर स्‍टार्मर भी पिछले दिनों चीन की यात्रा पर गए और उन्‍होंने बिजनस संबंधों को अपग्रेड किया है। लोधी ने कहा कि साऊथ-साऊथ के देशों के बीच व्‍यापार बढ़ रहा है और यह दुनिया के कुल व्‍यापार का एक चौथाई हो गया है। इसके और ज्‍यादा बढ़ने का अनुमान है। भारत भी ग्‍लोबल साऊथ का हिस्‍सा है।

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