31 जनवरी को लिखी गई चिट्ठी में झावेरी ने बताया कि वह 12 फरवरी, 2020 से ट्रस्टी के तौर पर काम कर रहे थे। उन्हें यह जिम्मेदारी दिवंगत रतन टाटा ने दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले पर उन्होंने पहले ही नोएल टाटा से बात कर ली थी और अब वह इसे औपचारिक रूप से बता रहे हैं। झावेरी ने अपने कार्यकाल को एक सम्मान बताया और उन्होंने टाटा ट्रस्ट्स को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस चिट्ठी की एक कॉपी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों और टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा को भी भेजी गई है।
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कब हुए थे बोर्ड में शामिल?
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, टाटा ग्रुप के मुख्य परोपकारी ट्रस्टों में से एक है। यह टाटा संस में एक बड़ी हिस्सेदारी रखता है। टाटा संस, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। प्रमित झावेरी को फरवरी 2020 में टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड में शामिल किया गया था। उस समय रतन टाटा इसके चेयरमैन थे। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट मिलकर टाटा संस के 51% से ज्यादा शेयर के मालिक हैं। यह टाटा संस, ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है।













