मिडिल ईस्ट आई के मुताबिक, इस साल यूनाइटेड अरब अमीरात रिवाज तोड़कर सऊदी अरब के एक दिन बाद रमजान शुरू कर सकता है। सालों से सऊदी अरब ने कुछ ऐसे दिनों में चांद दिखने की बात कही है, जब साइंटिस्ट और एस्ट्रोनॉमर्स का कहना है कि चांद देखना नामुमकिन है। हालांकि सऊदी अधिकारियों ने इन आलोचनाओं पर ध्यान नहीं दिया है।
चांद को लेकर क्यों है विवाद
मुसलमान लूनर कैलेंडर को मानते हैं, जिसमें 12 महीने होते हैं। ये महीने 29 या 30 दिनों के होते हैं। रमजान के महीने की शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर करती है। सऊदी अरब उम्म अल-कुरा नाम का एक कैलेंडर इस्तेमाल करता है, जो कैलकुलेशन पर आधारित है। यह कैलेंडर सालों पहले खास तारीखों को मार्क कर देता है।
उम्म अल-कुरा कैलेंडर के अनुसार, इस साल रमजान का पहला दिन बुधवार 18 फरवरी को होगा। दूसरी ओर यूएई में शारजाह यूनिवर्सिटी में शारजाह एकेडमी फॉर एस्ट्रोनॉमी स्पेस साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SAASST) ने कहा है कि मंगलवार 17 फरवरी को क्रिसेंट मून देखना साइंटिफिक रूप से नामुमकिन होगा। ऐसे में रमजान गुरुवार 19 फरवरी से शुरू होगा।
यूएई के फैसले पर नजर
अबू धाबी के एस्ट्रोनॉमर मोहम्मद ओदेह ने कहा है कि UAE या सऊदी अरब में मंगलवार को चांद नहीं दिखेगा। दूसरी ओर माना जा रहा है कि सऊदी अरब बुधवार से रमजान शुरू होने की घोषणा करेगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि UAE भी सऊदी के साथ ही रमजान शुरू करेगा या फिर वह इसे नहीं मानेगा।
भारत में रमजान अमूमन सऊदी अरब के एक दिन बाद शुरू होता है। सऊदी में रमजान का चांद 17 फरवरी 2026 को दिखने की उम्मीद की जा रही है। ऐसे में सऊदी में पहला रोजा 18 फरवरी को रखा जाएगा। भारत में पहला रोजा 19 फरवरी, गुरुवार का हो सकता है। हालांकि इसका फैसला चांद दिखने पर ही होगा।













