घरेलू क्रिकेट के रहे जबरदस्त प्लेयर
रमन लांबा ने दिल्ली के लिए रणजी ट्रॉफी में 1980-81 के सीजन से करियर की शुरुआत की। वह घरेलू क्रिकेट के जबरदस्त बल्लेबाज के तौर पर पहचाने गए। चार दिनी मैचों में भी आजकल की टी20 क्रिकेट के स्टाइल में खेलने के कारण उन्हें मोस्ट स्टायलिश प्लेयर का तमगा मिला, जिसका खेल देखने के लिए दर्शक मैदान में आते थे। लांबा ने टीम इंडिया से बाहर होने के कई साल बाद 1994-95 के रणजी सीजन में 1034 रन बनाए थे, जिसमें 3 शतक और 4 फिफ्टी शामिल थी। यह लंबे समय तक एक रणजी सेशन में सबसे ज्यादा रन का रिकॉर्ड बना रहा। इसी सीजन में उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा स्कोर 312 रन भी बनाया था। यह भी लंबे समय तक दिल्ली के लिए किसी प्लेयर का बेस्ट स्कोर रहा था। रमन लांबा ने 121 फर्स्ट क्लास मैचों में 8776 रन 53.84 के औसत से बनाए थे, जिसमें 31 शतक और 27 फिफ्टी शामिल हैं। शतक और फिफ्टी के अंतर से ही आप समझ सकते हैं कि वे किस तरह के बल्लेबाज थे।
टेस्ट में नहीं वनडे में दिखाया खूब रंग
टीम इंडिया के लिए रमन लांबा पहली बार 17 दिसंबर, 1986 को टेस्ट क्रिकेट खेलने उतरे। श्रीलंका के खिलाफ कानपुर टेस्ट से उन्होंने करियर शुरू किया, लेकिन महज 4 टेस्ट मैच ही खेल सके। इन 4 टेस्ट मैच में उन्होंने 53 रन के उच्चतम स्कोर के साथ 102 रन बनाए। हालांकि करीब 3 साल बाद 1989 के पाकिस्तान दौरे पर उन्हें टीम में जगह मिली, लेकिन नेट्स में उंगली में चोट लगने पर मैच नहीं खेल पाए और उनका टेस्ट करियर इसी सीरीज के साथ खत्म हो गया।
हालांकि रमन लांबा ने वनडे क्रिकेट में जमकर रंग दिखाया। क्रिकेट का यह फॉर्मेट उनके खेलने के स्टाइल को भाता था। टीम इंडिया के लिए उनकी और कृष्णमाचारी श्रीकांत की ओपनिंग जोड़ी उसी अटैकिंग मोड में खेलती थी, जिसमें उस दौर में केवल वेस्टइंडीज के बल्लेबाज खेलने के लिए जाने जाते थे। लांबा-श्रीकांत की जोड़ी का ही स्टाइल 1990 के दशक के मध्य में श्रीलंका और बाकी टीमों ने अपनाया था, जिसने क्रिकेट का रंग ही बदल दिया। इसी के चलते सचिन तेंदुलकर जैसे बल्लेबाज मिडिल ऑर्डर से निकलकर ओपनर बने थे। लांबा ने 7 सितंबर, 1986 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जयपुर में पहला वनडे मैच खेला था, जबकि उनका आखिरी मैच 22 दिसंबर, 1989 को पाकिस्तान दौरे पर लाहौर में रहा था। अपने पहले वनडे में ही उन्होंने 64 रन ठोक दिए थे। कुल 32 वनडे मैच में उन्होंने 27 के औसत से 783 रन बनाए, जिसमें 1 शतक और 6 फिफ्टी शामिल थीं।
मैदान पर मारपीट के लिए लगा 10 महीने का बैन
रमन लांबा का सबसे विवादित पल 1990 के रणजी सीजन में आया, जब मुंबई के तेज गेंदबाज राशिद पटेल के साथ उनकी पिच पर ही बहस हो गई। रमन बैटिंग कर रहे थे। बहस इतनी बढ़ी कि रमन लांबा ने स्टंप्स उखाड़कर पटेल को मैदान में दौड़ा लिया। दोनों के बीच मारपीट हुई। इसके चलते लांबा पर 10 महीने और पटेल पर 14 महीने तक क्रिकेट नहीं खेलने का बैन लगा। यही वो समय था, जब लांबा आयरलैंड में क्लब क्रिकेट खेलने चले गए थे
आयरिश लड़की से हुआ प्यार तो उस देश के लिए भी खेले
रमन लांबा दिखने में बेहद खूबसूरत और स्मार्ट क्रिकेटर थे। वे आयरलैंड के सॉनेट क्लब की तरफ से स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट्स में खेलने गए तो उन्हें देखने के लिए बहुत सारी लड़कियां मैदान में आती थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात किम मिशेल क्रॉथर से हुई। दोनों को पहली नजर में एक-दूसरे से प्यार हो गया। रमन लांबा ने सितंबर, 1990 में किम से लव मैरिज कर ली। दोनों के दो बच्चे जैस्मिन और कामरान हैं। अब किम दोनों बच्चों के साथ पुर्तगाल में रहती हैं। किम से शादी करने के कारण लांबा आयरलैंड की तरफ से खेलने की योग्यता हासिल करने की कोशिश करने लगे। आयरलैंड तब तक आईसीसी की तरफ से एसोसिएटड मान्यता प्राप्त देश था। लांबा ने 1990 में आयरलैंड की तरफ से इंग्लैंड की ससेक्स काउंटी के खिलाफ मुकाबले भी खेले थे।
तीन गेंद बची थी दिन की, शॉर्ट लेग पर फील्डिंग ने ले ली जान
रमन लांबा भारतीय घरेलू क्रिकेट में खेलने के साथ ही इंग्लैंड, आयरलैंड और बांग्लादेश में क्लब क्रिकेट भी खेलते थे। इस दौरान उनकी इमेज अपनी मनमर्जी की करने वाले दबंग क्रिकेटर की थी। यही स्वभाव उनकी दुखद मौत का कारण भी बना। लांबा 20 फरवरी, 1998 को ढाका प्रीमियर लीग में अबहानी क्रीड़ा क्लब की तरफ से मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के खिलाफ मैच में उतरे। दिन के खेल की महज 3 गेंद बची हुई थी। पिच पर मोहम्मड स्पोर्टिंग क्लब के युवा बल्लेबाज मेहराब हुसैन बैटिंग कर रहे थे। 38 साल 48 दिन की उम्र वाले लांबा ने आखिरी पलों में दबाव बनाने की सोची और स्पिनर सैफुल्लाह खान की गेंदबाजी पर फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर फील्डिंग के लिए खड़े हो गए।
कप्तान ने उन्हें इसके लिए मना किया, लेकिन वे नहीं माने। महज तीन गेंद बची होने के कारण उन्होंने हेलमेट और एल-गार्ड भी नहीं मंगाया। मेहराब हुसैन ने अगली गेंद पर जोरदार पुल शॉट खेला, जो सीधे लांबा के माथे पर लगा। ‘अरे यार मैं तो मर गया’ कहते हुए लांबा नीचे गिर गए। हालांकि वे फिर खड़े हुए, लेकिन कुछ ही पलों में उन्हें उलटियां होने लगीं और वे बेहोश होकर गिर गए। उन्हें तत्काल अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां वे कोमा में चले गए। गेंद की चोट से उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था। उनकी पत्नी उस समय एयरपोर्ट पर प्लेन में सवार होने लग रही थी। अनाउंसमेंट के जरिये उन्हें सूचना दी गई। दिल्ली से भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर बुलाए गए, लेकिन 3 दिन बाद 23 फरवरी, 1998 को लांबा का निधन हो गया। लांबा को घायल करने वाला शॉट खेलने वाले मेहराब हुसैन बाद में बांग्लादेश के लिए पहला इंटरनेशनल शतक बनाने वाले बल्लेबाज बने। उन्होंने एक इंटरव्यू में साझा किया था कि किस तरह लांबा के निधन के बाद वे मेंटल ट्रॉमा में चले गए थे और महीनों तक ठीक से सो नहीं पाए थे।














