बेंच ने सुनवााई से किया इनकार
CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने मंगलवार को उस जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें राजनेताओं और मीडिया के लिए ऐसे भाषणों की रिपोर्टिंग या प्रसारण को लेकर दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई थी, जो कथित रूप से भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों को प्रभावित करते हैं।
कोर्ट ने कही ये बात
अदालत ने शिक्षाविद् रूप रेखा वर्मा सहित 12 याचिकाकर्ताओं से राजनीतिक भाषणों पर दिशानिर्देश तय करने संबंधित नई अर्जी देने को कहा। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के कथित हेट स्पीच की पृष्ठभूमि में याचिका दायर की गई थी। एक दिन पहले, CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने असम के CM के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।
किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है याचिका
मंगलवार को सिब्बल ने कहा कि माहौल विषाक्त होता जा रहा है और जब राजनीतिक भाषण भाईचारे को दूषित करते हैं, तब जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि याचिका किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हालांकि, बेंच इससे सहमत नहीं दिखी। CJI ने कहा कि याचिका किसी विशेष राजनीतिक दल के चुनिंदा व्यक्तियों को टारगेट करती हुई लगती है।
स्वीकार्य नहीं होगी नहीं होगी ऐसी याचिकाएं
CJI ने कहा, ‘सिलेक्टेड कुछ व्यक्तियों को निशाना बनाने वाली याचिका स्वीकार्य नहीं होगी और ऐसी चुनौती निष्पक्ष और ऑब्जेक्टिव होनी चाहिए। अदालत ऐसी याचिका पर विचार करने को इच्छुक है, बशर्ते वह निष्पक्षता के साथ दायर की जाए।’ CJI ने कहा कि याचिका निश्चित रूप से एक विशेष व्यक्ति (सरमा) को लक्षित करती है, क्योंकि इसमें केवल उनके भाषणों का उल्लेख है।
वकील कपिल सिब्बल ने किया स्पष्ट
सिब्बल ने स्पष्ट किया कि वे सरमा के विरुद्ध कोई विशिष्ट राहत नहीं मांग रहे हैं और याचिका से उनका उल्लेख हटाने का आश्वासन दिया, साथ ही न्यायालय से व्यापक मुद्दे पर विचार करने का आग्रह किया। अदालत ने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है, उन्हें निष्पक्ष होना चाहिए। सिब्बल ने याचिका में संशोधन पर सहमति जताई। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि सभी पक्षों से संयम बरतना चाहिए।
कोर्ट ने की थी ये अपील
CJI ने कहा- हम पहले भी संयम के लिए कह चुके हैं मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री के विरुद्ध FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं पर राजनेताओं से संयम की अपील की थी। उन्होंने कहा, ‘कल (सोमवार को) हमारी पहली टिप्पणी यह थी कि हम सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करना चाहते हैं कि कृपया संवैधानिक नैतिकता, संवैधानिक मूल्यों, आपसी सम्मान और आत्मसम्मान के सिद्धांतों का पालन करें।
’75 साल पुराना लोकतंत्र है, ऐसे व्यवहार की अपेक्षा नहीं’
चीफ जस्टिस ने कहा कि वैचारिक सिद्धांतों के आधार पर चुनाव लड़े, लेकिन सम्मान के साथ। हम 75 वर्ष पुराना परिपक्व लोकतंत्र है। आप लोगों से इस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा नहीं करते। परंतु यह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। यही हमारी अपेक्षा है। सिब्बल ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के लिए सिद्धात निर्धारित किए जाने चाहिए। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि आखिरकार राजनीतिक नेताओं को देश में बंधुत्व को बढ़ावा देना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुद्दा अत्यत गंभीर है, परंतु याचिका लापरवाही से तैयार की गई है।
इस मुद्दे पर बहस की है गुंजाइश?
इस मामले की अहमियत समझते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना ने भी कहा कि राजनीतिक नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाना चाहिए और सभी पक्षों से संयम बरतने की आवश्यकता पर बल दिया। लेकिन, उन्होंने यह भी कहा, ‘मान लीजिए हम दिशानिर्देश बना दें तो उनका पालन कौन करेगा? विचार को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है? हमे विचारों को संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप विकसित करना होगा।’ बहरहाल नई याचिका दायर करने के लिए कहा गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और एक नई दिशा देखने को मिल सकती है।














