राजपाल यादव ने बीते 5 फरवरी को कोर्ट की फटकार के बाद तिहाड़ जेल में सरेंडर किया है। मामला साल 2010 में मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए लिए कर्ज का है। बॉलीवुड एक्टर की ओर से अदलात में जमानत की अर्जी लगाई गई है, जिसमें एक पारिवारिक शादी में शामिल होने को कारण बताया गया है।
जज बोले- इससे पहले कम से कम दो दर्जन मौकों पर भी यही वादा किया है
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने गुरुवार सुबह अदालत में राजपाल यादव की बेल अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि आपने परिवार में शादी के कारण बेल मांगी थी। एक्टर के वकील ने कहा कि वह आज, यानी गुरुवार को ही कोर्ट के सामने पैसे जमा करेंगे। इस पर जस्टिस शर्मा ने उन्हें टोका और कहा, ‘इससे पहले कम से कम दो दर्जन मौकों पर यादव ने बयान दिया कि वह अपना वादा पूरा करेंगे और पैसे देंगे, लेकिन हर बार वह ऐसा करने में नाकाम रहे।’
अदालत ने कहा- आप पहले अपना मन बना लें
केस की सुनवाई के दौरान, जस्टिस शर्मा की अदालत ने नोट किया कि राजपाल यादव के वकील ने खुद भी यह बयान दिया था कि पैसे शिकायत करने वाले को दिए जाएंगे। खुद राजपाल यादव ने भी यही बयान दिया था। जस्टिस शर्मा ने इसके बाद एक्टर के वकील से कहा, ‘आप जेल इसलिए गए, क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया। आप पहले अपना मन बना लें और इस मामले पर आज दोपहर 2:30PM बजे फिर से सुनवाई होगी।’
राजपाल यादव से जुड़ी ये मुसीबत कहां से हुई शुरू
ये पूरी कहानी साल 2010 से शुरू हुई। राजपाल यादव ने बतौर डायरेक्टर फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने का फैसला लिया। बताया जाता है कि बड़े बजट की इस फिल्म को बनाने के लिए उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (M/s Murali Projects) नाम की कंपनी से 5 करोड़ रुपये उधार लिए थे और इसके बदले 8 करोड़ चुकाने की बात कही गई थी। फिल्म में करीब 170 कलाकार थे। हालांकि, उम्मीद से उलट ये फिल्म बुरी तरह से फ्लॉप रही। इस फिल्म की वजह से उन्हें तगड़ा आर्थिक चोट पहुंचा। हालात ये हो गए कि जिस कंपनी से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया वो भी डूब गया। एक्टर वो रकम आज तक लौटा नहीं पाए और इसके बाद कंपनी ने फिर राजपाल यादव के खिलाफ केस कर दिया । एक्टर पर ये आरोप लगे कि राजपाल ने जो भी चेक दिए, वो बाउंस हो गए।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने कई बार भेजा नोटिस
इस केस में कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को कई बार नोटिस भेजा। राजपाल लंबे समय तक कोर्ट में पेश नहीं हुए। कहा जाता है कि इसी मामले में गलत हलफनामा देने की वजह से साल 2013 में उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस सजा के तहत राजपा 3 से 6 दिसंबर 2013 तक यानी चार दिनों तक जेल में रहे। हालांकि बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उनकी अपील पर ये सजा निलंबित कर दी थी। इसी केस में निचली अदालत ने राजपाल यादव को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए सजा पर अस्थायी रोक लगा दी कि एक्टर कोई आदतन अपराधी नहीं हैं और इसी आधार पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावनाएं तलाशने की सलाह भी दी थी।
जनवरी में एक्टर को कोर्ट से मिला था अंतिम मौका
वहीं इस साल जनवरी 2026 में कोर्ट ने एक्टर को अंतिम मौका देते हुए निर्देश जारी किया था। एक्टर के वकील ने कोर्ट को बताया था कि राजपाल ने 50 लाख रुपये का इंतजाम कर लिया है और भुगतान करने के लिए एक हफ्ते का और समय मांगा था। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सरेंडर करने के लिए समय बढ़ाने की राजपाल यादव की अर्जी खारिज कर दी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में बार-बार किए गए वादों का उल्लंघन काफी गंभीर है। कोर्ट ने ये भी कहा कि एक्टर को कई मौके दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने अदालत के भरोसे को तोड़ा है। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी को शाम 4 बजे तक सरेंडर करने का आदेश दिया था।













