राजपाल यादव को 16 फरवरी को दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम बेल मिल गई थी, पर कागजी कार्रवाई पूरी होने में वक्त लगा, जिसके कारण उन्हें बुधवार, 17 फरवरी की शाम 5 बजे रिहा किया गया। कोर्ट ने उन्हें 18 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत दी है। राजपाल ने भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए कोर्ट में अंतरिम जमानत की मांग की थी। राजपाल यादव को 30 दिन की मोहलत मिल गई है, पर 18 मार्च को उन्हें फिर से कोर्ट में हाजिर होना होगा और तब अगली सुनवाई होगी।
राजपाल यादव की अपील- जेलों में स्मोकिंग जोन बनें
राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में रहने के दौरान करीब 20 हजार कैदियों से बातें की थीं और उन्हें लेकर जेल से बाहर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से एक गुजारिश की। उन्होंने कहा कि कुछ कैदी ऐसे हैं, जिन्हें दूसरा मौका दिया जाना चाहिए। हालांकि, इस पर वह भतीजी की शादी के बाद विस्तार से बात करेंगे। वहीं, अपने गांव में उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जेलों में स्मोकिंग जोन बनाए जाने चाहिए, ताकि कोई बीमारी न हो और किसी पर इसका असर न पड़े।’
‘स्मोकिंग प्रमोट नहीं कर रहे पर अगर बिजनेस हो रहा है तो अलग जगह भी बने’
राजपाल यादव ने कहा कि वह स्मोकिंग को प्रमोट नहीं कर रहे हैं, लेकिन जब देश में स्मोकिंग की चीजें खूब बिक रही हैं और बिजनेस भी चलता है तो फिर इसके लिए जेल और सुधार गृहों में अलग से जगह होनी चाहिए। राजपाल ने कहा कि वह खुद स्मोकिंग का शिकार हैं और चाहकर भी छोड़ नहीं पा रहे हैं, जबकि कोशिश कर रहे हैं।
‘जेल सुधार केंद्र की तरह काम करें, कैदियों को सुधरने का मौका मिले’
‘पीटीआई’ के मुताबिक, राजपाल यादव ने कहा, ‘जेलों के अंदर रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट पर उपलब्ध सुविधाओं की तरह स्मोकिंग जोन होने चाहिए, जहां लोग स्मोकिंग कर सकें। जेलों को सुधार केंद्रों के रूप में कार्य करना चाहिए, जहां कैदियों को सुधार करने के लिए अवसर दिए जाएं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि जो लोग सुधार करने को तैयार नहीं हैं, उनके लिए कानून सर्वोपरि रहे।’
कैदियों के लिए राजपाल यादव ने कही यह बात
राजपाल यादव ने कहा कि जिस तरह देश की हर व्यवस्था में बदलाव हो रहा है और वह अपग्रेड हो रही है, वैसे ही जेलों को भी आधुनिक बनाना चाहिए। वह बोले, ‘बाहर से देखकर यह अंदाजा लगाना अकसर मुश्किल होता है कि कौन शातिर अपराधी है और किसने एक बार गलती की है। कुछ ऐसे कैदी भी हैं, जिन्हें पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है, लेकिन उन्हें कोर्ट में जाने की जरूरत नहीं है और वो अपनी गलती के कारण 10 साल से जेल में हैं। कानून से बड़ा कोई नहीं हैं और हम सभी कानून के अधीन हैं, पर साथ ही कैदियों के व्यवहार, आचरण और संस्कारों भी देखा जाना चाहिए।’
तिहाड़ जेल से बाहर आने पर यह बोले थे राजपाल यादव
वहीं, राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत में सभी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा था, ‘मुझे 30 साल हो जाएंगे बॉलीवुड में साल 2027 में। दुनिया का बच्चा-बच्चा मेरे साथ रहा तभी तो मैं 200-250 फिल्में कर पाया। ये किस्सा 2012-13 में शुरू हुआ था, 2026 में मैं 200-250 फिल्में किए हुए हूं। भारतीय सिनेमा का बच्चा-बूढ़ा और नौजवान मेरे कलेजे का टुकड़ा है। वो मेरे साथ था और साथ है। पिछले 10 साल में माननीय हाई कोर्ट ने जहां-जहां आदेश दिए मैं वहां-वहां हाजिर रहा। आगे भी जहां-जहां आदेश होगा, मैं बिल्कुल हाजिर रहूंगा।’
‘आरोप हैं तो हर चौराहे पर जवाब के लिए हाजिर रहूंगा’
राजपाल यादव ने यह भी कहा था कि अगर उन पर आरोप हैं, तो वह उनका जवाब देने के लिए हर कोने और चौराहे पर हाजिर मिलेंगे। उन्होंने फिर दिल्ली हाई कोर्ट का शुक्रिया अदा किया कि उनका पक्ष कोर्ट ने सुना। राजपाल यादव अभी भतीजी की शादी में बिजी हैं और कहा कि वह अगले दो दिनों तक मीडिया से बात नहीं कर पाएंगे और उसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी सवालों के जवाब देंगे।
राजपाल यादव क्यों गए थे जेल? क्या है चेक बाउंस मामला?
राजपाल यादव को साल 2010 में बनाई फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े चेक बाउंस केस में जेल जाना पड़ा था। राजपाल ने की फिल्म में तब मुरली प्रोजेक्ट्स (M/s Murali Projects) प्राइवेट कंपनी ने 5 करोड़ रुपये लगाए थे। लेकिन 2012 में फिल्म रिलीज हुई तो फ्लॉप हो गई और सारे पैसे डूब गए। राजपाल यादव इस कदर पैसों की तंगी में डूबे कि उनकी खुद की पूंजी गई और साथ में मुरली प्रोजेक्ट्स की भी। वह समय रहते पैसे वापस नहीं कर पाए। समय के साथ ब्याज बढ़ता गया और 5 करोड़ की रकम 9 करोड़ रुपये हो गई। राजपाल ने रकम लौटाने के लिए बीच-बीच में जो सात चेक दिए, वो बाउंस हो गए। तब कंपनी ने राजपाल यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। कंपनी और राजपाल यादव के बीच समझौते की बात भी हुई, लेकिन एक्टर रकम नहीं चुका पाए।
समझौते के बाद भी रकम नहीं चुका पाए थे राजपाल यादव, 18 मार्च को सुनवाई
इसके बाद साल 2018 में राजपाल यादव को दिल्ली की कड़कड़ूमा कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए छह महीने जेल की सजा सुना दी। इसके खिलाफ राजपाल दिल्ली हाई कोर्ट गए, जहां से उन्हें राहत मिली। सिर्फ इस आधार पर कि राजपाल समय पर भुगतान कर देंगे, पर जब ऐसा नहीं हो पाया तो कोर्ट ने राजपाल यादव को और रियायत देने से इनकार कर दिया और फटकार लगाई। इसके बाद 5 फरवरी को राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया था। अब वह अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर हैं और मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।













