एकजुटता दिखाने का मौका
इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्यसभा चुनाव के जरिये कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी में सबकुछ ठीक है और एकजुटता है। ये इलेक्शन विपक्षी एकता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए अपने विधायकों को एक साथ रखने की चुनौती होगी। पिछली बार कांग्रेस को हरियाणा में क्रॉस वोटिंग का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस बार कांग्रेस और सहयोगी दलों को सावधान रहना होगा। कुछ सीटों के नतीजे तय माने जा रहे हैं, लेकिन विपक्ष क्रॉस वोटिंग नहीं रोक सका तो सीट गंवाएगा।
हरियाणा में खेल शुरू
हरियाणा से BJP सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगरा का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म होने वाला है। 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में एक सीट BJP और एक कांग्रेस के खाते में जा सकती है। मगर, यहां अभी से ही खेल शुरू हो गया है। अगस्त 2022 में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस के अजय माकन हार गए थे, जबकि BJP व JJP के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा की जीत हुई थी। हरियाणा में राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 31 विधायकों का समर्थन जरूरी है। BJP के पास 48 व कांग्रेस के 37 विधायक हैं।
हिमाचल-बिहार में पेच
68 सदस्यों वाली हिमाचल विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव होगा। 40 विधायक होने के बाद भी कांग्रेस को सावधान रहना होगा। 2024 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी बहुमत होने के बावजूद हार गए थे। तब कांग्रेस के कुछ विधायकों और निर्दलीय ने BJP प्रत्याशी को जिता दिया था। अभी BJP के 28 विधायक हैं। कांग्रेस को चिंता सता रही है कि इस बार ऐसा कुछ न हो।
बिहार में 5 सीटों के लिए चुनाव होना है। 243 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट पर जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की दरकार है। NDA के 202 विधायक है। इस लिहाज से उसकी 4 सीटें तय हैं। आशंका है कि 35 सीटों वाला विपक्षी गठबंधन INDIA अपने बूते एक सीट भी नहीं जीत पाएगा। ऐसे में 5 विधायकों वाली AIMIM की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यहां अगर पूरा विपक्ष साथ आ जाए तो एक सीट उसके खाते में आ सकती है। ऐसे में RJD, कांग्रेस, वामदल और अन्य सहयोगियों की एकजुटता जरूरी होगी।













